“हर एक को अपनी दिल से पूछना है कि हम कहाँ तक फूल बने हैं और ज्ञान की खुशबू फैलाते हैं? अपने जैसा फूल किसको बनाया है? यह तो बच्चे जानते हैं – ज्ञान का सागर बाप है, उनकी कितनी Read more…
“तो अपने 5 रूपों को जानते हो ना! पहला सभी का ज्योति बिन्दु रूप, आ गया आपके सामने! कितना चमकता हुआ प्यारा रूप है। दूसरा देवता रूप, वह रूप भी कितना प्यारा और न्यारा है। तीसरा रूप मध्य में पूज्यनीय Read more…
“बाप भी समझाते हैं – यह तो छी–छी दुनिया है, इनका नाम ही है डेविल वर्ल्ड, नर्क। यह कोई अच्छा अक्षर है क्या? कहाँ डीटी वर्ल्ड, कहाँ डेविल वर्ल्ड, इस डेविल वर्ल्ड में सब तंग हो गये हैं। परन्तु वापिस Read more…
“प्रश्नः–ड्रामा अनुसार कौन सी बात 100 प्रतिशत सरटेन है? जिसकी तुम बच्चों को खुशी है? उत्तर:-ड्रामा अनुसार सरटेन है कि नई राजधानी स्थापन होनी ही है। तुम बच्चों को खुशी है कि श्रीमत पर हम अपने लिए अपनी राजधानी स्थापन Read more…
“अपने को आत्मा अशरीरी समझो, अब हमको वापिस जाना है। यह मेहनत बहुत करनी है। सवेरे स्नान आदि करके फिर एकान्त में ऊपर छत पर वा हाल में आकर बैठ जाओ। जितना एकान्त हो उतना अच्छा है। हमेशा यही ख्याल Read more…
Advanced, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, आत्मा | Soul, परमात्मा | शिव बाबा | Supreme Soul | Shiv Baba
“आत्मा पर माया का जो बन्धन चढ़ा है, उसे उतारकर प्युअर बनाते हैं और कहते हैं कि मेरा काम है आत्माओं को सर्व बन्धनों से छुड़ा करके वापस ले जाना, तो सृष्टि के जो अनादि नियम और कायदे हैं उन्हें Read more…
“बाप शिक्षा देते हैं आत्माओं को। आत्मा को अभी अपने स्वधर्म का पता है कि हम आत्मा इस शरीर को चलाने वाली हैं। आत्मा का यह रथ है। जैसे बाप इस रथ पर आकर सवार हुए हैं, तुम्हारी आत्मा भी Read more…
Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, परमात्मा | शिव बाबा | Supreme Soul | Shiv Baba, ब्रह्मा बाबा | Brahma Baba, सृष्टि चक्र | World Cycle
“बाप कहते हैं, तुम सतोप्रधान थे। अब तमोप्रधान पतित बन गये हो। 84 जन्म पूरे लिए हैं। अब तुमको फिर सतोप्रधान बनना है। सतोप्रधान बनो तब ही तुम चल सकेंगे पवित्र दुनिया में। निराकारी दुनिया भी पवित्र है, साकारी दुनिया Read more…
“जैसे लक्ष्य हिम्मत का रखा है वैसे लक्षण भी हिम्मत का रखेंगे तो कोई बड़ी बात नहीं है। जब लक्ष्य ही है बाप समान बनने का तो अभी लक्ष्य और लक्षण एक करना है। फालो ब्रह्मा बाप। जो भी संकल्प, Read more…
“तुम्हें भी एक तो निश्चय यह है कि हम आत्मा हैं और दूसरा यह भी निश्चय है कि हम आत्मायें अभी परमपिता परमात्मा से वर्सा ले रहे हैं। मन्सा–वाचा–कर्मणा, तन–मन–धन से हम शिवबाबा के मददगार बनते हैं। यह सब कुछ Read more…