“बापदादा दोनों कहते हैं बच्चे, बाप को याद करो और कहाँ भी बुद्धि योग न जाये। बुद्धि बहुत भटकती है। भक्ति मार्ग में भी ऐसे होता है। श्रीकृष्ण के आगे वा किसी भी देवता के आगे बैठते हैं, माला फेरते Read more…
Advanced, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, ज्ञान | Knowledge, ड्रामा | Drama, श्रीमत | Shrimat, सेवा | Service
Topic(s): Advanced; Mind; Service; Knowledge; Shrimat; Patience “हर एक पुरुषार्थी बच्चे को पहले अन्तर्मुख अवस्था अवश्य धारण करनी है। अन्तर्मुखता में बड़ा ही कल्याण समाया हुआ है, इस अवस्था से ही अचल, स्थिर, धैर्यवत, निर्मान–चित्त इत्यादि दैवी गुणों की धारणा Read more…
Advanced, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, आत्मा | Soul, शिव बाबा | Shiv Baba, श्रीमत | Shrimat
“बाप भी अशरीरी है, तुम आत्मा भी अशरीरी हो। बाप आत्माओं को ही देखते हैं, सब अकालतख्त पर विराजमान आत्मायें हैं। तुम भी आत्मा भाई–भाई की दृष्टि से देखो, इसमें बड़ी मेहनत है। देह के भान में आने से ही Read more…
“झाड़ वृद्धि को पाना ही है। यहाँ तो यह सारा कनेक्शन है। मीठे दैवी झाड़ का जो होगा वह निकल आयेगा।” “The tree has to grow. Here, all of this is connected. Those who belong to this sweet deity tree Read more…
Advanced, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, ज्ञान | Knowledge, ड्रामा | Drama, पुरुषार्थ | Effort, याद | Remembrance, श्रीमत | Shrimat, सृष्टि चक्र | World Cycle
“पहले–पहले बच्चों को सावधानी मिलती है – बाप को याद करो और वर्से को याद करो। मनमनाभव। यह अक्षर भी व्यास ने लिखा है। संस्कृत में तो बाप ने समझाया नहीं है। बाप तो हिन्दी में ही समझाते हैं। बच्चों Read more…
Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, याद | Remembrance, वर्सा | Inheritance, श्रीमत | Shrimat
Title: Remembrance; Inheritance; Shrimat “देह–अभिमान में आने से बाप को भूल दु:ख उठाते हो। जितना बाप को याद करेंगे उतना बेहद के बाप से सुख उठायेंगे।” “By becoming body conscious, you forget the Father and take sorrow on yourself. Read more…
Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, आत्मा | Soul, याद | Remembrance, योग | Yoga, श्रीमत | Shrimat
Title: Remembrance; Soul; Shrimat; Yoga “तुम पवित्र देवी–देवतायें थे, तुम्हारा कुल वा डिनायस्टी है, वह सब निर्विकारी थे। कौन निर्विकारी थे? आत्मायें। अब फिर तुम निर्विकारी बन रहे हो। जैसेकि सर्वशक्तिमान् बाप को याद कर उनसे शक्ति ले रहे Read more…
Title: Shrimat – Shiv Baba’s Direction or Brahma Baba’s? “रूहानी बाप आकर अपने रूहानी बच्चों अर्थात् रूहों को बैठ समझाते हैं।” “The spiritual Father comes and sits here and explains to His spiritual children, that is, to you spirits.” Read more…