Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Category: Advanced

8th August 2026

(1) यह भी बच्चे जानते हैं कि दिन-प्रतिदिन हमको शान्ति में ही जाना है। शान्ति तो सबको बहुत पसन्द होती है। बड़े आदमी जास्ती नहीं बोलते हैं और न जोर से बोलते हैं। तुम बहुत-बहुत बड़े आदमी बनते हो वास्तव Read more…


6th August 2026

(1) प्रश्नः-योग की सिद्धि क्या है? पक्के योगी की निशानी सुनाओ?उत्तर:-सब कर्मेन्द्रियाँ बिल्कुल शान्त, शीतल हो जाएं – यह है योग की सिद्धि। पक्के योगी बच्चे वह जिनकी कर्मेन्द्रियाँ जरा भी चंचल न हों। रिंचक भी किसी देहधारी में आंख Read more…


4th August 2026

अब तो बच्चों को आत्म-अभिमानी बनना है। बहुत मेहनत भी है। घड़ी-घड़ी अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। यह है गुप्त मेहनत। बाप भी गुप्त, तो मेहनत भी गुप्त कराते हैं। बाप स्वयं आकर कहते हैं बच्चों, Read more…


3rd August 2026

ऋषि उन्हों को कहा जाता है जो पवित्र रहते हैं। Rishis are those who remain pure. बाप तो हिन्दी में ही समझाते हैं। यहाँ सब हिन्दी-हिन्दी कहते रहते हैं ना। जो उन्हों की भाषा है। वास्तव में प्राचीन भाषा हिन्दी Read more…


1st August 2026

प्रश्नः-अशरीरी बनने का अभ्यास जो सदा करते रहते, उनकी मुख्य निशानी सुनाओ?उत्तर:-वे हठ से अपनी कर्मेन्द्रियों को वश नहीं करते। लेकिन उनकी कर्मेन्द्रियाँ स्वत: शीतल हो जाती हैं। हम आत्मा भाई-भाई हैं, यह स्मृति स्वत: रहती है। देह-अभिमान छूटता जाता Read more…


30th July 2026

“तुम जानते हो शिवबाबा तो दाता है। भगवान कभी कुछ ले नहीं सकते, वह तो देते हैं। ईश्वर अर्थ दान सब करते हैं तो समझते हैं – दूसरे जन्म में इसका एवज़ा मिलेगा। कामना तो रखते हैं। अब यह तो Read more…


27th July 2026

“बाप ज्ञान देते हैं सद्गति के लिए। सद्गति कहा जाता है जीवन–मुक्ति धाम को। यह आत्मा को बुद्धि में धारण करना है। हमारा घर शान्तिधाम है। उसको मुक्तिधाम, निर्वाणधाम भी कहा जाता है। सबसे अच्छा नाम है – शान्तिधाम। यहाँ Read more…


26th July 2026

“बापदादा हर बच्चे से यही चाहते हैं कि हर एक बच्चा सदा स्वराज्य अधिकारी बनके रहे। कभी–कभी नहीं क्योंकि अभी के स्वराज्य अधिकार का वरदान बाप ने इस संगमयुग के लिए पूरा दिया है, थोड़ा नहीं, कभी–कभी वाला नहीं, सदा। Read more…


22nd July 2026

“प्रश्नः–तुम कर्मयोगी बच्चों को कौन सा अभ्यास निरन्तर करना चाहिए? उत्तर:-अभी–अभी शरीर निर्वाह अर्थ देह में आये और अभी–अभी देही–अभिमानी। देह की स्मृति बिगर कर्म तो हो नहीं सकता इसलिए अभ्यास करना है कि कर्म किया, देह–अभिमानी बनें फिर देही–अभिमानी Read more…


20th July 2026

“तुम इस पाठशाला में रोज़ यही पाठ पढ़ते हो कि हम शरीर नहीं आत्मा हैं। आत्म–अभिमानी बनने से ही तुम मनुष्य से देवता, नर से नारायण बन जाते हो। इस समय सब मनुष्य मात्र पुजारी अर्थात् पतित देह–अभिमानी हैं इसलिए Read more…


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