Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Category: Sakar Vaani – Key Points in Hindi and English

15th July 2026

“ब्राह्मण बच्चे जानते हैं वह है बेहद का निराकार बाप और प्रजापिता ब्रह्मा है बेहद का साकार बाप। बेहद के साकार बाप प्रजापिता ब्रह्मा बिगर कोई होता नहीं।” “You Brahmin children know that He is the unlimited, incorporeal Father and Read more…


14th July 2026

“मीठे बच्चे – याद की यात्रा में कभी थकना नहीं, देह–अभिमान के तूफान थकाते हैं, देही–अभिमानी बनो तो थक दूर हो जायेगा” “Sweet children, never become tired of the pilgrimage of remembrance. It is the storms of body consciousness that Read more…


13th July 2026

“पहले–पहले हमारा कितना छोटा फूलों का झाड़ था, रूहानी गॉर्डन था। तुम चैतन्य फूल थे। इनको कहा जाता है फूलों का बगीचा। फिर वही कांटों का बगीचा होता जाता है। इस समय सब कांटे बन गये हैं। फिर कांटों से Read more…


11th July 2026

“मीठे बच्चे – तुम्हें अपना चिंतन करना है, दूसरे का नहीं क्योंकि ड्रामा अनुसार जो करेगा वह पायेगा” “Sweet children, each of you now has to think about yourself and not others, because, according to this drama, whoever does anything Read more…


10th July 2026

“डबल ओम् शान्ति। एक शिवबाबा कहते हैं, एक ब्रह्मा दादा कहते हैं। दोनों का स्वधर्म है शान्त। दोनों ही शान्तिधाम में रहने वाले हैं। तुम बच्चे भी शान्तिधाम में रहने वाले हो। निराकार देश में रहने वाले आये हो साकारी Read more…


9th July 2026

“मनुष्य सृष्टि का बीजरूप इसलिए वृक्षपति कहते हैं। बीज ठहरा, तो पति भी ठहरा। वृक्ष के बीज को बाप भी कहेंगे। उनसे वृक्ष उत्पन्न होता है। यह है मनुष्य सृष्टि रूपी झाड़। इनका बीज ऊपर में है। तुम जानते हो Read more…


8th July 2026

“किसकी याद है? परमपिता परमात्मा शिवबाबा की। उनकी याद में रहने से हमारे जो भी विकर्म हैं, वह भस्म हो जायेंगे और विकर्माजीत बन जायेंगे, जितना जो याद की ड्रिल में रहेंगे। यह आत्मा की ड्रिल है, शरीर की नहीं।” Read more…


7th July 2026

“अपने को रूह आत्मा समझो, हमको बाबा मिला है, जिसको आधाकल्प याद करते थे। यह कभी भूलो मत। आधाकल्प आत्मा इस शरीर द्वारा याद करती आई है – हे पतित–पावन, हे दु:ख हर्ता सुख कर्ता क्योंकि रावण राज्य है ना। Read more…


6th July 2026

“हम आत्मा शान्त स्वरूप हैं, दुनिया को पता ही नहीं। हम अपने स्वरूप में टिक जाते हैं, हमारा स्वधर्म है शान्त। हमारी आत्मा शान्त स्वरूप है। उनको यह पता ही नहीं इसलिए शान्ति माँगते हैं। आत्मा कहती है – शान्ति Read more…


4th July 2026

“तुम बच्चे अब समझते हो बाप सद्गति के लिए आकर ज्ञान–योग सिखलाते हैं। सिखलाने वाला तो जरूर चाहिए ना। शरीर तो नहीं सिखलायेगा। आत्मा ही सब कुछ करती है। आत्मा में ही अच्छे बुरे संस्कार रहते हैं। इस समय रावण Read more…


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