Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

Browsing:

Category: आत्मा | Soul

4th August 2026

अब तो बच्चों को आत्म-अभिमानी बनना है। बहुत मेहनत भी है। घड़ी-घड़ी अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। यह है गुप्त मेहनत। बाप भी गुप्त, तो मेहनत भी गुप्त कराते हैं। बाप स्वयं आकर कहते हैं बच्चों, Read more…


1st August 2026

प्रश्नः-अशरीरी बनने का अभ्यास जो सदा करते रहते, उनकी मुख्य निशानी सुनाओ?उत्तर:-वे हठ से अपनी कर्मेन्द्रियों को वश नहीं करते। लेकिन उनकी कर्मेन्द्रियाँ स्वत: शीतल हो जाती हैं। हम आत्मा भाई-भाई हैं, यह स्मृति स्वत: रहती है। देह-अभिमान छूटता जाता Read more…


31st July 2026

“मैं आता ही हूँ सिर्फ बच्चों को नॉलेज देने। सुप्रीम रूह, रूहों को बैठ समझाते हैं। रूह ही सुनती है, हर एक बात रूह करती है। संस्कार भी रूह ले जाती है जिसके आधार पर शरीर मिलता है।”I just come Read more…


30th July 2026

“तुम जानते हो शिवबाबा तो दाता है। भगवान कभी कुछ ले नहीं सकते, वह तो देते हैं। ईश्वर अर्थ दान सब करते हैं तो समझते हैं – दूसरे जन्म में इसका एवज़ा मिलेगा। कामना तो रखते हैं। अब यह तो Read more…


27th July 2026

“बाप ज्ञान देते हैं सद्गति के लिए। सद्गति कहा जाता है जीवन–मुक्ति धाम को। यह आत्मा को बुद्धि में धारण करना है। हमारा घर शान्तिधाम है। उसको मुक्तिधाम, निर्वाणधाम भी कहा जाता है। सबसे अच्छा नाम है – शान्तिधाम। यहाँ Read more…


20th July 2026

“तुम इस पाठशाला में रोज़ यही पाठ पढ़ते हो कि हम शरीर नहीं आत्मा हैं। आत्म–अभिमानी बनने से ही तुम मनुष्य से देवता, नर से नारायण बन जाते हो। इस समय सब मनुष्य मात्र पुजारी अर्थात् पतित देह–अभिमानी हैं इसलिए Read more…


16th July 2026

“वह आये, अपनी ताकत दिखाये, जलवा दिखाये। वही सर्वशक्तिमान् है ना। बरोबर उनमें कशिश भी है ना। सब कुछ छुड़ा देते हैं। बरोबर जो बाप के बच्चे और बच्चियां बनते हैं वह आसुरी सम्प्रदाय के सम्बन्ध से तंग हो जाते Read more…


14th July 2026

“मीठे बच्चे – याद की यात्रा में कभी थकना नहीं, देह–अभिमान के तूफान थकाते हैं, देही–अभिमानी बनो तो थक दूर हो जायेगा” “Sweet children, never become tired of the pilgrimage of remembrance. It is the storms of body consciousness that Read more…


13th July 2026

“पहले–पहले हमारा कितना छोटा फूलों का झाड़ था, रूहानी गॉर्डन था। तुम चैतन्य फूल थे। इनको कहा जाता है फूलों का बगीचा। फिर वही कांटों का बगीचा होता जाता है। इस समय सब कांटे बन गये हैं। फिर कांटों से Read more…


11th July 2026

“मीठे बच्चे – तुम्हें अपना चिंतन करना है, दूसरे का नहीं क्योंकि ड्रामा अनुसार जो करेगा वह पायेगा” “Sweet children, each of you now has to think about yourself and not others, because, according to this drama, whoever does anything Read more…


×