Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Tag: आत्मा | Soul

2nd May 2026

“दुनिया वाले भी अब यह समझ रहे हैं कि अब विनाश का समय है और स्थापना–अर्थ भगवान कहाँ गुप्त वेष में है। अब गुप्त वेष में तो तुम आत्मायें भी हो। आत्मा अलग है, शरीर अलग है। यह मनुष्य चोला Read more…


1st May 2026

“बाप बैठ समझाते हैं – भक्ति मार्ग में बहुत ही भक्ति की डांस की, ज्ञान की डांस नहीं की। भक्ति की डांस जब होती है तो ज्ञान की नहीं। जब ज्ञान की होती है तो भक्ति की नहीं क्योंकि भक्ति Read more…


30th April 2026

“बच्चे जानते हैं वह निराकार जो सभी आत्माओं का बाप है, सर्व का सद्गति दाता है वह हमको पढ़ा रहे हैं। यह सारी रचना उस एक रचता की प्रापर्टी है। तो खुद ही बैठ रचना के आदि–मध्य–अन्त का राज़ समझाते Read more…


28th April 2026

“मैं आत्मा बिन्दी हूँ, हमारा बाप भी बिन्दी है – यह भूल जाते हैं। यह है डिफीकल्ट सब्जेक्ट। अपने को आत्मा भी भूल जाते तो बाप को याद करना भी भूल जाते। देही–अभिमानी बनने का अभ्यास नहीं है। आत्मा बिन्दी Read more…


25th April 2026

“आत्मा अविनाशी है। वह कभी खत्म नहीं होती। आत्मा जो स्टार मिसल है, वह अति सूक्ष्म है। इन आंखों से देखने में नहीं आती है। कर्तव्य सब आत्मा करती है। परन्तु घड़ी–घड़ी देह–अभिमान में आ जाते हैं तो कहते हैं Read more…


24th April 2026

“कहते हैं – अभी तुमको अशरीरी बनना है अर्थात् देह के भान को भूलना है। यह पुरानी दुनिया तो मिट जायेगी। इस शरीर को तो छोड़ना है अर्थात् सबको छोड़ना है क्योंकि यह दुनिया ही खत्म होनी है। तो अब Read more…


IMAGE REPOSITORY

– Understanding The Soul: A Spiritual Framework – Soul: Its Powers And Treasures – Desire: A Tender Crust, A Turbulent Core – The Hunger That Shapes Us – Sanskar and Thought Cycle – A Shackled Mind


18th April 2026

“ओम् माना मैं आत्मा हूँ और मेरा यह शरीर है। शरीर भी कह सकता है कि मेरी यह आत्मा है। जैसे शिवबाबा कहते हैं तुम मेरे हो। बच्चे कहते हैं बाबा आप हमारे हो। वैसे आत्मा भी कहती है मेरा Read more…


16th April 2026

“प्रश्नः–देवी देवताओं के कर्म श्रेष्ठ थे, अभी सबके कर्म भ्रष्ट क्यों बने हैं? उत्तर:-क्योंकि अपने असली धर्म को भूल गये हैं। धर्म भूलने के कारण ही जो कर्म करते हैं वह भ्रष्ट होते हैं। बाप तुम्हें अपने सत धर्म की Read more…


15th April 2026

“भारतवासियों का गृहस्थ–धर्म पवित्र था। प्योरिटी भी थी, सुख–शान्ति भी थी, सम्पत्ति भी बहुत थी। अब वही भारत पतित बना है, सब विकारी बने हैं। यह है दु:खधाम। भारत सुखधाम था। और जहाँ हम आत्मायें निवास करती हैं – वह Read more…


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