Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Tag: श्रीमत | Shrimat

18th August 2026

(1) त्रिमूर्ति भी बड़ा क्लीयर है। ऊपर में शिव भी है। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर भी है, सूक्ष्मवतन वासी फिर ऊंच ते ऊंच है भगवान। बच्चे भी समझते हैं जहाँ बाप रहते हैं वह है हम आत्माओं के रहने का स्थान, Read more…


10th August 2026

(1) बाप तो सिर्फ तुम बच्चों को ही देखते हैं, उनको तो किसी को याद नहीं करना है। इनकी आत्मा को तो बाप को याद करना है। बाप कहते हैं हम दोनों तुम बच्चों को ही देखते हैं। मुझ आत्मा Read more…


11th July 2026

“मीठे बच्चे – तुम्हें अपना चिंतन करना है, दूसरे का नहीं क्योंकि ड्रामा अनुसार जो करेगा वह पायेगा” “Sweet children, each of you now has to think about yourself and not others, because, according to this drama, whoever does anything Read more…


10th July 2026

“डबल ओम् शान्ति। एक शिवबाबा कहते हैं, एक ब्रह्मा दादा कहते हैं। दोनों का स्वधर्म है शान्त। दोनों ही शान्तिधाम में रहने वाले हैं। तुम बच्चे भी शान्तिधाम में रहने वाले हो। निराकार देश में रहने वाले आये हो साकारी Read more…


1st July 2026

“अब यह तो बच्चे जानते हैं कि आत्माओं का बाप शिवबाबा है। यह भी तुम जानते हो कि मैं पतित–पावन हूँ, मैं निराकार हूँ। तुम भी निराकार हो, शान्त स्वरूप हो। निराकार बाप भी शान्त स्वरूप है, आत्मा भी शान्त Read more…


30th June 2026

“बच्चे सब सम्मुख बैठे हैं तो जानते हैं हम जीव आत्मायें हैं। यहाँ तो जीव आत्मायें होंगी ना। जब आत्मा को शरीर नहीं है तो नंगी है, उसको अशरीरी कहा जाता है। तुम तो शरीर के साथ बैठे हो। आत्मा Read more…


13th June 2026

“जिन्होंने 84 जन्म लिए हैं वही यह नॉलेज सुनेंगे वा जो सतयुग–त्रेता में आने वाले हैं वही आकर ब्राह्मण बनेंगे, नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार। बाप ने समझाया है अभी तुम ब्राह्मण वर्ण में हो फिर वही देवता वर्ण में आयेंगे।” “Only Read more…


4th May 2026

“बापदादा दोनों कहते हैं बच्चे, बाप को याद करो और कहाँ भी बुद्धि योग न जाये। बुद्धि बहुत भटकती है। भक्ति मार्ग में भी ऐसे होता है। श्रीकृष्ण के आगे वा किसी भी देवता के आगे बैठते हैं, माला फेरते Read more…


11th April 2026

Topic(s): Advanced; Mind; Service; Knowledge; Shrimat; Patience “हर एक पुरुषार्थी बच्चे को पहले अन्तर्मुख अवस्था अवश्य धारण करनी है। अन्तर्मुखता में बड़ा ही कल्याण समाया हुआ है, इस अवस्था से ही अचल, स्थिर, धैर्यवत, निर्मान–चित्त इत्यादि दैवी गुणों की धारणा Read more…


8th April 2026

“बाप भी अशरीरी है, तुम आत्मा भी अशरीरी हो। बाप आत्माओं को ही देखते हैं, सब अकालतख्त पर विराजमान आत्मायें हैं। तुम भी आत्मा भाई–भाई की दृष्टि से देखो, इसमें बड़ी मेहनत है। देह के भान में आने से ही Read more…


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