“बापदादा दोनों कहते हैं बच्चे, बाप को याद करो और कहाँ भी बुद्धि योग न जाये। बुद्धि बहुत भटकती है। भक्ति मार्ग में भी ऐसे होता है। श्रीकृष्ण के आगे वा किसी भी देवता के आगे बैठते हैं, माला फेरते Read more…
Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, आत्मा | Soul, ड्रामा | Drama, परमात्मा | शिव बाबा | Supreme Soul | Shiv Baba
“दुनिया वाले भी अब यह समझ रहे हैं कि अब विनाश का समय है और स्थापना–अर्थ भगवान कहाँ गुप्त वेष में है। अब गुप्त वेष में तो तुम आत्मायें भी हो। आत्मा अलग है, शरीर अलग है। यह मनुष्य चोला Read more…
Advanced, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, आत्मा | Soul, उतरती कला और चढ़ती कला | Ascension and Descension, ज्ञान और भक्ति | Knowledge and Devotion, मातेश्वरी जी | Mateshwari ji
“बाप बैठ समझाते हैं – भक्ति मार्ग में बहुत ही भक्ति की डांस की, ज्ञान की डांस नहीं की। भक्ति की डांस जब होती है तो ज्ञान की नहीं। जब ज्ञान की होती है तो भक्ति की नहीं क्योंकि भक्ति Read more…
“बच्चे जानते हैं वह निराकार जो सभी आत्माओं का बाप है, सर्व का सद्गति दाता है वह हमको पढ़ा रहे हैं। यह सारी रचना उस एक रचता की प्रापर्टी है। तो खुद ही बैठ रचना के आदि–मध्य–अन्त का राज़ समझाते Read more…
“मैं आत्मा बिन्दी हूँ, हमारा बाप भी बिन्दी है – यह भूल जाते हैं। यह है डिफीकल्ट सब्जेक्ट। अपने को आत्मा भी भूल जाते तो बाप को याद करना भी भूल जाते। देही–अभिमानी बनने का अभ्यास नहीं है। आत्मा बिन्दी Read more…
Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, आत्मा | Soul, परमात्मा | शिव बाबा | Supreme Soul | Shiv Baba
“आत्मा अविनाशी है। वह कभी खत्म नहीं होती। आत्मा जो स्टार मिसल है, वह अति सूक्ष्म है। इन आंखों से देखने में नहीं आती है। कर्तव्य सब आत्मा करती है। परन्तु घड़ी–घड़ी देह–अभिमान में आ जाते हैं तो कहते हैं Read more…
“कहते हैं – अभी तुमको अशरीरी बनना है अर्थात् देह के भान को भूलना है। यह पुरानी दुनिया तो मिट जायेगी। इस शरीर को तो छोड़ना है अर्थात् सबको छोड़ना है क्योंकि यह दुनिया ही खत्म होनी है। तो अब Read more…
– Understanding The Soul: A Spiritual Framework – Soul: Its Powers And Treasures – Desire: A Tender Crust, A Turbulent Core – The Hunger That Shapes Us – Sanskar and Thought Cycle – A Shackled Mind
“ओम् माना मैं आत्मा हूँ और मेरा यह शरीर है। शरीर भी कह सकता है कि मेरी यह आत्मा है। जैसे शिवबाबा कहते हैं तुम मेरे हो। बच्चे कहते हैं बाबा आप हमारे हो। वैसे आत्मा भी कहती है मेरा Read more…
Advanced, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, आत्मा | Soul, ड्रामा | Drama, सृष्टि चक्र | World Cycle, हिस्ट्री-जॉग्राफी | History and Geography
“प्रश्नः–देवी देवताओं के कर्म श्रेष्ठ थे, अभी सबके कर्म भ्रष्ट क्यों बने हैं? उत्तर:-क्योंकि अपने असली धर्म को भूल गये हैं। धर्म भूलने के कारण ही जो कर्म करते हैं वह भ्रष्ट होते हैं। बाप तुम्हें अपने सत धर्म की Read more…