“तुम बच्चों को अभी धीरज आ गया है। तुम जानते हो हमारा मर्तबा कितना ऊंच है वा कम है।” “You children have now developed patience. You know how elevated or low your status is” “बाप तो कहते हैं कि बच्चों Read more…
“कहा जाता है ज्ञान से सद्गति होती है। जरूर कहेंगे भक्ति और ज्ञान दोनों अलग–अलग हैं। मनुष्य समझते हैं कि भक्ति करने से ज्ञान मिलेगा तब सद्गति होगी। भक्ति के बीच में ज्ञान आ नहीं सकता। भक्ति सबके लिए है, Read more…
“बच्चे बाप से भी बाप द्वारा आगे जाते हैं” “You children go ahead of your Father through the Father” “आज अमृतवेले चारों ओर के बच्चों में एक बात जो ज्ञान का फाउण्डेशन है वह देखा। फाउण्डेशन है निश्चय।” “Today, at Read more…
– Understanding The Soul: A Spiritual Framework – Soul: Its Powers And Treasures – Desire: A Tender Crust, A Turbulent Core – The Hunger That Shapes Us – Sanskar and Thought Cycle – A Shackled Mind
“ओम् माना मैं आत्मा हूँ और मेरा यह शरीर है। शरीर भी कह सकता है कि मेरी यह आत्मा है। जैसे शिवबाबा कहते हैं तुम मेरे हो। बच्चे कहते हैं बाबा आप हमारे हो। वैसे आत्मा भी कहती है मेरा Read more…
“इस ज्ञान मार्ग में भी कभी ग्रहचारी बैठती है, कभी कुछ होता है। कभी प्रफुल्लित रहते, कभी मुरझाया हुआ चेहरा रहता है। यह होती है माया से लड़ाई। माया पर ही जीत पानी है। जब बेहोश होते हैं तब संजीवनी Read more…
Advanced, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, आत्मा | Soul, ड्रामा | Drama, सृष्टि चक्र | World Cycle, हिस्ट्री-जॉग्राफी | History and Geography
“प्रश्नः–देवी देवताओं के कर्म श्रेष्ठ थे, अभी सबके कर्म भ्रष्ट क्यों बने हैं? उत्तर:-क्योंकि अपने असली धर्म को भूल गये हैं। धर्म भूलने के कारण ही जो कर्म करते हैं वह भ्रष्ट होते हैं। बाप तुम्हें अपने सत धर्म की Read more…
Advanced, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, आत्मा | Soul, शान्तिधाम | Land of Peace, सुखधाम | Land of Happiness
“भारतवासियों का गृहस्थ–धर्म पवित्र था। प्योरिटी भी थी, सुख–शान्ति भी थी, सम्पत्ति भी बहुत थी। अब वही भारत पतित बना है, सब विकारी बने हैं। यह है दु:खधाम। भारत सुखधाम था। और जहाँ हम आत्मायें निवास करती हैं – वह Read more…
Advanced, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, उतरती कला और चढ़ती कला | Ascension and Descension, ड्रामा | Drama, सृष्टि चक्र | World Cycle
“तुम बच्चों को बाबा बहुत सहज बात बताते हैं, बरोबर यहाँ भारत में ही स्वर्ग था। लक्ष्मी–नारायण का राज्य था। चित्र भी हैं, यह तो सब मानेंगे कि सतयुग में उन्हों का राज्य था। वहाँ कोई दु:खी नहीं था, सम्पूर्ण Read more…
“तुम बच्चे कहेंगे हम फिर से सो देवता विश्व के मालिक बन रहे हैं। हम मालिक थे, अब तो क्या हाल हो गया है। कहाँ से कहाँ आकर पडे हैं। 84 जन्म भोगते–भोगते यह हाल आकर हुआ है। ड्रामा को Read more…