Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Month: May 2026

21st May 2026

“दुनिया में दु:ख के सिवाए और कुछ तो है नहीं। अभी तुम बुद्धिवान बने हो। बाप ने समझाया है ड्रामा के अन्दर नई दुनिया और पुरानी दुनिया, सुख और दु:ख का खेल बना हुआ है। बाप ने तुम्हारी बुद्धि का Read more…


20th May 2026

“रूहानी बच्चे अर्थात् जीव की आत्मा””You spiritual children, that is, you embodied souls” “अब तुम जानते हो – मुझ आत्मा ने 84 जन्म लिए हैं। संस्कार अच्छे वा बुरे आत्मा में रहते हैं। उन संस्कारों अनुसार शरीर भी ऐसा मिलता Read more…


19th May 2026

“मनमनाभव। यह संस्कृत अक्षर वास्तव में है नहीं। बाप ने जब सहज राजयोग सिखाया है तब यह संस्कृत अक्षर बोले नहीं हैं। यह तो संस्कृत जानते ही नहीं हैं। बाप तो हिन्दी में ही समझाते हैं। भल यह रथ हिन्दी, Read more…


18th May 2026

“बच्चे जानते हैं कि यह रूहानी परिवार है, वह सब है जिस्मानी परिवार। यह है रूहानी परिवार। रूहानी बाप का यह परिवार, जैसे लौकिक घर में माँ–बाप, बच्चे होते हैं, वह हुआ हद का परिवार। तुम अभी बेहद की फैमिली Read more…


17th May 2026

“पवित्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है इसलिए पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं लेकिन मन–वाणी–कर्म, सम्बन्ध–सम्पर्क में भी पवित्रता। पवित्रता के संस्कार सहज धारण करने वाले हो। तो पवित्रता का तो संकल्प किया है लेकिन अभी समय अनुसार बापदादा समय की वार्निंग Read more…


16th May 2026

“बेहद का बाप आया हुआ है। कल्प–कल्प आते हैं, माया रावण ने जो हमारा राज्य–भाग्य छीन लिया है, वह हम आत्माओं को फिर से अपना राज्य–भाग्य बाबा आकर देते हैं। ऐसे नहीं कि कोई लड़ाई से छीना गया है। नहीं। Read more…


15th May 2026

“भक्ति मार्ग में तुम बच्चों ने बहुत दु:ख देखे हैं। करके थोड़ा सुख है तो भी अल्पकाल के लिए। भक्ति में साक्षात्कार होता है। सो भी अल्पकाल के लिए तुम्हारी आश पूरी होती है, यह साक्षात्कार होता है – वह Read more…


14th May 2026

“आत्मा जानती है हम बिन्दी हैं। हमारा बाप भी ऐसे है। आत्मा ही प्रेजीडेन्ट है, आत्मा ही नौकर है। पार्ट आत्मा ही बजाती है। बाप है सबसे स्वीट। सब याद करते हैं हे पतित–पावन, दु:ख–हर्ता सुख–कर्ता आओ। अब तुम बच्चों Read more…


13th May 2026

“ओम् शान्ति का अर्थ तो बच्चों को समझाया है। आत्मा अपना परिचय देती है। मेरा स्वरूप शान्त है और मेरा रहने का स्थान शान्तिधाम है, जिसको परमधाम, निर्वाणधाम भी कहा जाता है। बाप भी कहते हैं कि देह–अभिमान छोड़ देही–अभिमानी Read more…


12th May 2026

“बहुत आजकल निकले हैं जो कहते हैं मेरे में शिवबाबा आते हैं, इसमें बड़ी सम्भाल चाहिए। माया की बहुत प्रवेशता होती है, जिनमें आगे श्री नारायण आदि आते थे, वह भी आज हैं नहीं। सिर्फ प्रवेशता से कुछ होता नहीं Read more…


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