“आत्मा जानती है हम बिन्दी हैं। हमारा बाप भी ऐसे है। आत्मा ही प्रेजीडेन्ट है, आत्मा ही नौकर है। पार्ट आत्मा ही बजाती है। बाप है सबसे स्वीट। सब याद करते हैं हे पतित–पावन, दु:ख–हर्ता सुख–कर्ता आओ। अब तुम बच्चों Read more…
“ओम् शान्ति का अर्थ तो बच्चों को समझाया है। आत्मा अपना परिचय देती है। मेरा स्वरूप शान्त है और मेरा रहने का स्थान शान्तिधाम है, जिसको परमधाम, निर्वाणधाम भी कहा जाता है। बाप भी कहते हैं कि देह–अभिमान छोड़ देही–अभिमानी Read more…
“बच्चों को यह स्मृति में रखना चाहिए कि सतयुग–त्रेता किसको कहा जाता है, द्वापर–कलियुग किसको कहा जाता है। उनमें कौन–कौन राज्य करते थे, तुम्हारी बुद्धि में पूरी नॉलेज है। जैसे बाप को रचना के आदि–मध्य–अन्त का ज्ञान है, वैसे तुम्हारी Read more…
“बच्चे जानते हैं – हमको उनके साथ जाना है, यह शरीर छोड़ देना है इसलिए कहते हैं, यह शरीर छोड़करके हम चले जायेंगे बाप के साथ। बाप आये ही हैं साथ ले जाने। यह बहुत समझ की बात है। बच्चे Read more…
“बच्चे बैठे हैं – समझ रहे हैं कि हमारा बापदादा आया हुआ है। बाप तो इकट्ठा हो जाता है दादा के साथ, तो कहेंगे बापदादा आये हैं। वह टीचर भी है। बाप, दादा के बिगर तो कुछ बता न सके।” Read more…
Brahma’s Day and Night, Sakar Vaani - Key Points in Hindi and English, The Four Yuga (Age) Cycle, आत्मा | Soul, ओम् शान्ति | Om Shanti
“बच्चों को ओम् शान्ति का अर्थ तो बहुत ही बार समझाया है। ओम् यानी मैं कौन? मैं आत्मा। यह शरीर हमारे आरगन्स हैं। मैं आत्मा परमधाम की रहने वाली हूँ।” “The meaning of “Om shanti” has been explained to you Read more…
“उस बाप को याद तो सभी मनुष्य करते हैं, उनको ही परमपिता परमात्मा कहते हैं। ब्रह्मा–विष्णु–शंकर को परमात्मा नहीं कहेंगे और किसको परमात्मा नहीं कह सकते हैं। भल इस समय तुम प्रजापिता ब्रह्मा कहते हो परन्तु प्रजापिता को कभी भक्तिमार्ग Read more…
“यह शरीर के दो नेत्र तो सबको हैं। तीसरा ज्ञान का नेत्र आत्मा को नहीं है, जिसको दिव्य–चक्षु भी कहते हैं। आत्मा अपने बाप को भूल गई है, इसलिए पुकारते हैं” “Everyone’s body has two physical eyes, but souls do Read more…
“बापदादा दोनों कहते हैं बच्चे, बाप को याद करो और कहाँ भी बुद्धि योग न जाये। बुद्धि बहुत भटकती है। भक्ति मार्ग में भी ऐसे होता है। श्रीकृष्ण के आगे वा किसी भी देवता के आगे बैठते हैं, माला फेरते Read more…
“दुनिया वाले भी अब यह समझ रहे हैं कि अब विनाश का समय है और स्थापना–अर्थ भगवान कहाँ गुप्त वेष में है। अब गुप्त वेष में तो तुम आत्मायें भी हो। आत्मा अलग है, शरीर अलग है। यह मनुष्य चोला Read more…