Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Tag: Avyakt Vaani

8th March 2026

“ज्ञान बीज है, लेकिन प्रेम का पानी बीज में प्राप्ति के फल लगा देता है। तो ऐसे बाप के स्नेही बच्चे बाप को याद करना मेहनत नहीं समझते हैं लेकिन भूलना मुश्किल समझते हैं। स्नेही कभी स्नेह को भूल नहीं Read more…


1st March 2026

“माया अकेले करने की कोशिश करती है लेकिन जो सदा कम्बाइण्ड रहने वाले हैं वह कभी भी अलग हो नहीं सकते क्योंकि माया अलग करके फिर पुराने संस्कारों को इमर्ज करती है और पुराने संस्कार इमर्ज हो जाते हैं तो Read more…


22nd February 2026

“आज बापदादा चारों ओर के बच्चों के तीन रूप देख रहे हैं – जैसे बाप के तीन रूप जानते हो, ऐसे बच्चों के भी तीन रूप देख रहे हैं। जो इस संगमयुग का लक्ष्य और लक्षण है, पहला स्वरूप ब्राह्मण, Read more…


15th February 2026

Title: Maya; Shiv Jayanti;   “चारों ओर भक्त भी शिव जयन्ती वा शिवरात्रि कहके मनाते हैं, बड़े प्यार से मनाते हैं बापदादा भक्तों को देख करके भक्तों को भी भक्ति का फल देते हैं। लेकिन आपका मनाना और भक्तों का Read more…


8th February 2026

Title: स्वमान | Self-Respect (Self-Sovereignty)   “आप सभी को जैसे बाप, ब्रह्मा बाप फरिश्ता बना तो निश्चित है फरिश्ता सो देवता बनना ही है। तो आपको भी फरिश्ता सो देवता बनना ही है। कई बच्चे कहते हैं कि चलते–चलते आपोजीशन Read more…


1st February 2026

“दो शब्द गिराने वाले भी हैं, चढ़ाने वाले भी हैं, वह दो शब्द सभी जानते हैं, सबके मन में आ गया है। वह दो शब्द हैं – मैं और मेरा। भाषण में कहते हो ना, क्लास भी कराते हो ना। Read more…


25th January 2026

Title: ज्ञान | Knowledge   “बापदादा ने रिजल्ट में चेक किया तो क्या देखा? ज्ञानी, योगी, धारणा स्वरुप, सेवाधारी, चार ही सब्जेक्ट में हर एक यथाशक्ति ज्ञानी भी है, योगी भी है, धारणा भी कर रहा है, सेवा भी कर Read more…


18th January 2026

“जितना–जितना योग में रहेंगे उतना कांटों से फूल, सतोप्रधान बनते जायेंगे। फूल बन गये फिर यहाँ रह नहीं सकेंगे। फूलों का बगीचा है ही स्वर्ग। जो बहुत कांटों को फूल बनाते हैं उन्हें ही सच्चा खुशबूदार फूल कहेंगे। वह कभी Read more…


11th January 2026

Title: सन्तुष्टता | Contentment   “सन्तुष्टता सदा सर्व प्राप्ति सम्पन्न है क्योंकि जहाँ सन्तुष्टता है वहाँ अप्राप्त कोई वस्तु नहीं। सन्तुष्ट आत्मा में सन्तुष्टता का नेचुरल नेचर है। सन्तुष्टता की शक्ति स्वत: और सहज चारों ओर वायुमण्डल फैलाती है। उनका Read more…


4th January 2025

“व्रत लेना अर्थात् वृत्ति का परिवर्तन करना।” “To make this vow (vrat) means to bring about transformation with your attitude (vruti).”   “आप सभी भी मन–वचन–कर्म, वृत्ति दृष्टि द्वारा पवित्रता का अनुभव कर रहे हो ना! पवित्रता की वृत्ति अर्थात् Read more…


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