1. “मीठे बच्चे – तुम्हारा मुख अभी स्वर्ग की तरफ है, तुम नर्क से किनारा कर स्वर्ग की तरफ जा रहे हो, इसलिए बुद्धि का योग नर्क से निकाल दो” “Sweet children, your faces are now towards heaven. You are Read more…
1. “मीठे बच्चे – तुम्हें संग बहुत अच्छा करना है, बुरे संग का रंग लगा तो गिर पड़ेंगे, कुसंग बुद्धि को तुच्छ बना देता है” “Sweet children, keep very good company. If you are coloured by bad company you fall. Read more…
1. “जिस आत्मा में पवित्रता है, उसकी चाल, चलन, चेहरा चमकता है इसलिए पवित्रता ही जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली है। वास्तव में आप सब बच्चों का आदि स्वरूप ही पवित्रता है। अनादि स्वरूप भी पवित्रता है। ऐसी पवित्र आत्माओं Read more…
1. “मीठे बच्चे – अमृतवेले अपने दूसरे सब संकल्पों को लॉकप (बंद) कर एक बाप को प्यार से याद करो, बाप से मीठी-मीठी रूहरिहान करो” “Sweet children, at amrit vela, just remember the one Father alone with a lot of Read more…
1. “प्रश्नः- जादूगर बाप की वन्डरफुल जादूगरी कौन-सी है जो दूसरा कोई नहीं कर सकता? उत्तर:- कौड़ी तुल्य आत्मा को हीरे तुल्य बना देना, बागवान बनकर काँटों को फूल बना देना – यह बहुत वन्डरफुल जादूगरी है जो एक जादूगर Read more…
1. “मीठे बच्चे – तुम इन आंखों से जो कुछ देखते हो यह सब पुरानी दुनिया की सामग्री है, यह समाप्त होनी है, इसलिए इस दु:खधाम को बुद्धि से भूल जाओ” “Sweet children, whatever you see with your eyes, it Read more…
1. “प्रश्नः- किस पुरुषार्थ में ही माया विघ्न डालती है? मायाजीत बनने की युक्ति क्या है? उत्तर:- तुम पुरुषार्थ करते हो कि हम बाप को याद करके अपने पापों को भस्म करें। तो इस याद में ही माया का विघ्न Read more…
1. “प्रश्नः- आसुरी संस्कारों को बदलकर दैवी संस्कार बनाने के लिए कौन-सा विशेष पुरुषार्थ चाहिए? उत्तर:- संस्कारों को बदलने के लिए जितना हो सके देही-अभिमानी रहने का अभ्यास करो। देह-अभिमान में आने से ही आसुरी संस्कार बनते हैं। बाप आसुरी Read more…
1. “तुम अभी ईश्वरीय मत वाले बनते हो। इस समय तुम बच्चों को पतित से पावन बनने के लिए ईश्वरीय मत मिल रही है।” “You children are now receiving God’s directions in order to become pure from impure.” 2. “यह Read more…
1. “इसलिए बापदादा सभी बच्चों को यही स्मृति दिलाते हैं कि सदा हर एक से दुआयें लो और दुआयें दो। अपने दुआओं की शुभ भावना से मंगल मिलन मनाओ क्योंकि अगर कोई बद-दुआ देता भी है, वह तो परवश है Read more…