“कभी भी कोई विकार की बात हमारे आगे आ नहीं सकती, सिर्फ विकार की भी बात नहीं। एक भूत नहीं परन्तु कोई भी भूत आ नहीं सकता। ऐसा शुद्ध अहंकार रहना चाहिए। बहुत ऊंच ते ऊंच भगवान के हम बच्चे Read more…
“प्रश्नः– बाप जो समझाते हैं उसे कोई सहज मान लेते, कोई मुश्किल समझते – इसका कारण क्या है? उत्तर:- जिन बच्चों ने बहुत समय भक्ति की है, आधाकल्प से पुराने भक्त हैं, वह बाप की हर बात को सहज मान Read more…
“रूहानी बाप ही रूहानी नॉलेज पढ़ाते हैं, इसलिए उनको टीचर भी कहते हैं, स्प्रीचुअल फादर पढ़ाते हैं।” इस रूहानी नॉलेज से हम अपना आदि सनातन देवी–देवता धर्म स्थापन करते हैं।” “आत्मा अच्छे वा बुरे संस्कार ले जाती है।” “अपने को Read more…
“मूलवतन, सूक्ष्मवतन, स्थूल वतन – यह है सारी युनिवर्स। खेल कोई सूक्ष्मवतन वा मूलवतन में नहीं चलता है, नाटक यहाँ ही चलता है।” “आत्माओं के बाप को बाबा कहेंगे। दूसरा कोई नाम होता नहीं। बाबा का नाम है शिव।” “अपवित्र Read more…
1. “बाप सिर्फ कहते हैं मनमनाभव अर्थात् अपने को आत्मा समझ मुझे याद करो।” 2. “पापों को भस्म कर पावन होंगे, याद की यात्रा से।” 3. “योग अर्थात् याद की यात्रा।” 4. “अपने को आत्मा समझने से देह का अहंकार Read more…