1. “बाप को जानना, इसे ज्ञान कहा जाता है। यह भी तुम समझते हो हम पहले अज्ञानी थे। बाप को भी नहीं जानते थे, अपने को भी नहीं जानते थे। अब समझते हो हम आत्मा हैं, न कि शरीर। आत्मा Read more…
1. “सर्वशक्तिमान बाप की याद से शक्ति ले रहे हो। बाप ने समझाया है आत्मा ही 84 का पार्ट बजाती है। आत्मा में ही सतोप्रधानता की ताकत थी, वह फिर दिन–प्रतिदिन कम होती जाती है। सतोप्रधान से तमोप्रधान तो बनना Read more…
“प्रश्नः– बच्चों की किस एक भूल से माया बहुत बलवान बन जाती है? उत्तर:- बच्चे भोजन के समय बाबा को भूल जाते हैं, बाबा को न खिलाने से माया भोजन खा जाती, जिससे वह बलवान बन जाती है, फिर बच्चों Read more…
1. “आत्मा और शरीर दोनों का बाप अलग–अलग है। आत्मा बच्चा भी निराकारी है तो बाप भी निराकारी है। यह भी तुम बच्चों की बुद्धि में है वह निराकार शिवबाबा हमारा बाप है, कितना छोटा है। यह अच्छी रीति याद Read more…
1. “वास्तव में सृष्टि भर में महिमा जो भी है उस एक की ही है और कोई की महिमा है नहीं। अभी देखो ब्रह्मा में अगर बाबा की प्रवेशता नहीं होती तो यह कौड़ी तुल्य है। अभी तुम कौड़ी तुल्य Read more…
1. “तुम अपने मुख से सदैव रत्न निकालो, पत्थर नहीं।” 2. “बाप ध्यान के लिए भी डायरेक्शन देते हैं सिर्फ भोग लगाकर आओ। बाबा यह तो कहते नहीं कि वैकुण्ठ में जाओ, रास–विलास आदि करो। दूसरी जगह गये तो Read more…
“प्रश्नः– जो विनाशकाले विपरीत बुद्धि हैं, उन्हें तुम्हारी किस बात पर हँसी आती है? उत्तर:- तुम जब कहते हो अभी विनाश काल नज़दीक है, तो उन्हें हँसी आती है। तुम जानते हो बाप यहाँ बैठे तो नहीं रहेंगे, बाप की Read more…
“प्रश्नः– अवस्था बिगड़ने का कारण क्या है? किस युक्ति से अवस्था बहुत अच्छी रह सकती है? उत्तर:- 1. ज्ञान की डांस नहीं करते, झरमुई झगमुई में अपना समय गँवा देते हैं इसलिए अवस्था बिगड़ जाती है। 2. दूसरों को दु:ख Read more…
1. “बेहद का बाप आत्माओं को सुनाते हैं। आत्मा ही सुनती है। सब कुछ आत्मा ही करती है – इस शरीर द्वारा इसलिए पहले–पहले अपने को आत्मा जरूर समझना है।” 2. “योग अर्थात् पढ़ाने वाले की याद। यह बाप Read more…
“मीठे बच्चे – सारा मदार कर्मों पर है, सदा ध्यान रहे कि माया के वशीभूत कोई उल्टा कर्म न हो जिसकी सजा खानी पड़े“ 1. “इस पुरानी दुनिया को देखते हुए भी न देखो।“ 2. “बाप का भी Read more…