Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Author: admin

25th May 2025

1. “जिस आत्मा में पवित्रता है, उसकी चाल, चलन, चेहरा चमकता है इसलिए पवित्रता ही जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली है। वास्तव में आप सब बच्चों का आदि स्वरूप ही पवित्रता है। अनादि स्वरूप भी पवित्रता है। ऐसी पवित्र आत्माओं Read more…


24th May 2025

1. “मीठे बच्चे – अमृतवेले अपने दूसरे सब संकल्पों को लॉकप (बंद) कर एक बाप को प्यार से याद करो, बाप से मीठी-मीठी रूहरिहान करो” “Sweet children, at amrit vela, just remember the one Father alone with a lot of Read more…


23rd May 2025

1. “प्रश्नः- जादूगर बाप की वन्डरफुल जादूगरी कौन-सी है जो दूसरा कोई नहीं कर सकता? उत्तर:- कौड़ी तुल्य आत्मा को हीरे तुल्य बना देना, बागवान बनकर काँटों को फूल बना देना – यह बहुत वन्डरफुल जादूगरी है जो एक जादूगर Read more…


22nd May 2025

1. “मीठे बच्चे – तुम इन आंखों से जो कुछ देखते हो यह सब पुरानी दुनिया की सामग्री है, यह समाप्त होनी है, इसलिए इस दु:खधाम को बुद्धि से भूल जाओ” “Sweet children, whatever you see with your eyes, it Read more…


21st May 2025

1. “प्रश्नः- किस पुरुषार्थ में ही माया विघ्न डालती है? मायाजीत बनने की युक्ति क्या है? उत्तर:- तुम पुरुषार्थ करते हो कि हम बाप को याद करके अपने पापों को भस्म करें। तो इस याद में ही माया का विघ्न Read more…


20th May 2025

1. “प्रश्नः- आसुरी संस्कारों को बदलकर दैवी संस्कार बनाने के लिए कौन-सा विशेष पुरुषार्थ चाहिए? उत्तर:- संस्कारों को बदलने के लिए जितना हो सके देही-अभिमानी रहने का अभ्यास करो। देह-अभिमान में आने से ही आसुरी संस्कार बनते हैं। बाप आसुरी Read more…


19th May 2025

1. “तुम अभी ईश्वरीय मत वाले बनते हो। इस समय तुम बच्चों को पतित से पावन बनने के लिए ईश्वरीय मत मिल रही है।” “You children are now receiving God’s directions in order to become pure from impure.” 2. “यह Read more…


18th May 2025

1. “इसलिए बापदादा सभी बच्चों को यही स्मृति दिलाते हैं कि सदा हर एक से दुआयें लो और दुआयें दो। अपने दुआओं की शुभ भावना से मंगल मिलन मनाओ क्योंकि अगर कोई बद-दुआ देता भी है, वह तो परवश है Read more…


17th May 2025

1. “अपने से पूछना है – हम फूल बना हूँ? कहाँ देह-अहंकार में आकर कांटा तो नहीं बनता हूँ? मनुष्य अपने को आत्मा समझने बदले देह समझ लेते हैं। आत्मा को भूलने से बाप को भी भूल गये हैं। बाप Read more…


16th May 2025

1. “प्रश्नः- किसी भी देहधारी मनुष्य के बोल की भेंट बाप से नहीं की जा सकती है – क्यों? उत्तर:- क्योंकि बाप का एक-एक बोल महावाक्य है। जिन महावाक्यों को सुनने वाले महान अर्थात् पुरुषोत्तम बन जाते हैं। बाप के Read more…


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