Title: Shrimat – Shiv Baba’s Direction or Brahma Baba’s? “रूहानी बाप आकर अपने रूहानी बच्चों अर्थात् रूहों को बैठ समझाते हैं।” “The spiritual Father comes and sits here and explains to His spiritual children, that is, to you spirits.” Read more…
“तुम बच्चे हो ईश्वरीय सम्प्रदाय। आगे थे आसुरी सम्प्रदाय। आसुरी सम्प्रदाय को यह पता नहीं है कि भोलानाथ किसको कहा जाता है। यह भी नहीं जानते कि शिव शंकर अलग–अलग हैं। वह शंकर देवता है, शिव बाप है। कुछ भी Read more…
“बाप बैठ समझाते हैं, यह दादा भी समझते हैं क्योंकि बाप बैठ दादा द्वारा समझाते हैं। तुम जैसे समझते हो वैसे दादा भी समझते हैं। दादा को भगवान नहीं कहा जाता। यह है भगवानुवाच।” “The Father sits here and explains. Read more…
If an appropriate title were to be given to today’s Murli (31st December 2025), it would be: “Are You Madhuban Ready ?” Take a moment to look within to introspect, self-reflect, and ask yourself the following questions: If any of Read more…
“प्रश्नः–इस ईश्वरीय मिशन में जो पक्के निश्चय बुद्धि हैं उनकी निशानियां क्या होंगी? उत्तर:-1- वे स्तुति–निंदा… सबमें धीरज से काम लेंगे, 2. क्रोध नहीं करेंगे, 3. किसी को भी दैहिक दृष्टि से नहीं देखेंगे। आत्मा को ही देखेंगे, आत्मा होकर Read more…
“अभी तो थोड़े हैं, अनेकानेक बच्चे हो जायेंगे। इस समय थोड़े प्रैक्टिकल में बने हो फिर भी इस प्रजापिता ब्रह्मा को जानते तो सब हैं ना। नाम ही है प्रजापिता ब्रह्मा। कितनी ढेर प्रजा है। सब धर्म वाले इनको मानेंगे Read more…
“प्रश्नः–आत्मा के संबंध में कौन सी एक महीन बात महीन बुद्धि वाले ही समझ सकते हैं? उत्तर:-आत्मा पर सुई की तरह धीरे–धीरे जंक (कट) चढ़ती गई है। वह याद में रहने से उतरती जायेगी। जब जंक उतरे अर्थात् आत्मा तमोप्रधान Read more…
“बापदादा ने पहले भी बताया है कि खजाने तो मिले लेकिन जमा करने की विधि क्या है? जो जितना निमित्त और निर्मान बनता है उतना ही खजाने जमा होते हैं। तो चेक करो – निमित्त और निर्मान बनने की विधि Read more…
Question: How do the insights of the world’s leading scientists, including Albert Einstein, conceptually echo Baba’s reference to the end of the Confluence Age, and when do they predict it may occur? Answer: Time, as we understand it in the physical Read more…
“प्रश्नः–किन दो शब्दों का राज़ तुम्हारी बुद्धि में होने कारण पुरानी दुनिया से बेहद का वैराग्य रहता है? उत्तर:-उतरती कला और चढ़ती कला का राज़ तुम्हारी बुद्धि में है। तुम जानते हो आधाकल्प हम उतरते आये, अभी है चढ़ने का Read more…