1. “पावन दुनिया में पावन भारत था। तुम्हारे पास प्रदर्शनी आदि में भिन्न–भिन्न प्रकार के मनुष्य आते हैं। कोई कहते हैं जैसे भोजन जरूरी है वैसे यह विकार भी भोजन है, इनके बिना मर जायेंगे। अब ऐसी बात तो है Read more…
“प्रश्नः– किस बात का सदा सिमरण होता रहे तो माया तंग नहीं करेगी? उत्तर:- हम बाप के पास आये हैं, वह हमारा बाबा भी है, शिक्षक भी है, सतगुरू भी है परन्तु है निराकार। हम निराकारी आत्माओं को पढ़ाने वाला Read more…
“प्रश्नः– याद में मुख्य मेहनत कौन सी है? उत्तर:- बाप की याद में बैठते समय देह भी याद न आये। आत्म–अभिमानी बन बाप को याद करो, यही मेहनत है, इसमें ही विघ्न पड़ता है क्योंकि आधाकल्प देह–अभिमानी रहे हो। भक्ति Read more…
1. “हर एक के दिल में “मेरा बाबा” इसी स्नेह का गीत बज रहा है। स्नेह ही इस देह और देह के सम्बन्ध से न्यारा बना रहा है। स्नेह ही मायाजीत बना रहा है। जहाँ दिल का स्नेह है वहाँ Read more…
“प्रश्नः– बाप के संग से तुम्हें क्या–क्या प्राप्तियां होती हैं? उत्तर:- बाप के संग से हम मुक्ति, जीवन–मुक्ति के अधिकारी बन जाते हैं। बाप का संग तार देता है (पार ले जाता है)। बाबा हमें अपना बनाकर आस्तिक और त्रिकालदर्शी Read more…
“मीठे बच्चे – तुम्हें अपने योगबल से सारी सृष्टि को पावन बनाना है, तुम योगबल से ही माया पर जीत पाकर जगतजीत बन सकते हो“ 1. “तुम फिर योगबल से इस सृष्टि को पावन बना रहे हो। माया पर Read more…
“प्रश्नः– बाप की पढ़ाई में तुम्हें कौन–सी विद्या नहीं सिखाई जाती है? उत्तर:- भूत विद्या। किसी के संकल्पों को रीड करना, यह भूत विद्या है, तुम्हें यह विद्या नहीं सिखाई जाती। बाप कोई थॉट रीडर नहीं है। वह जानी जाननहार Read more…
“प्रश्नः– अच्छे–अच्छे पुरूषार्थी बच्चों की निशानी क्या होगी? उत्तर:- जो अच्छे पुरूषार्थी हैं वह सवेरे–सवेरे उठकर देही–अभिमानी रहने की प्रैक्टिस करेंगे। वह एक बाप को याद करने का पुरूषार्थ करेंगे। उन्हें लक्ष्य रहता कि और कोई देहधारी याद न आये, Read more…
“प्रश्नः– बाप के वर्से का अधिकार किस पुरूषार्थ से प्राप्त होता है? उत्तर:- सदा भाई–भाई की दृष्टि रहे। स्त्री–पुरुष का जो भान है वह निकल जाए, तब बाप के वर्से का पूरा अधिकार प्राप्त हो। परन्तु स्त्री–पुरूष का भान वा Read more…
1. “ड्रामा में चेन्ज हो नहीं सकती। जो कुछ ड्रामा में नूँध हैं, वह हूबहू होना ही है। ऐसे नहीं, होकर फिर बदल जाना है।” 2. “यह भी गायन है जैसा अन्न वैसा मन।” 3. “तुम्हारी बुद्धि अब Read more…