1. “समान बच्चे ही बाप के दिल में समाये हुए हैं। समान बच्चों की विशेषता है – वह सदा निर्विघ्न, निर्विकल्प, निर्मान और निर्मल होंगे। ऐसी आत्मायें सदा स्वतंत्र होती हैं, किसी भी प्रकार के हद के बन्धन में बंधायमान Read more…
1. “इतनी बड़ी अथॉरिटी का स्वमान बच्चों को दिया। तो हर एक अपने को इतना स्वमानधारी समझते हैं? स्वमानधारी का विशेष लक्षण क्या होता है? जितना जो स्वमानधारी होगा उतना ही सर्व को सम्मान देने वाला होगा। जितना स्वमानधारी उतना Read more…
1. “जैसे बाप के विशेष तीन सम्बन्ध याद रहते हैं वैसे बच्चों के भी तीन रूप देख हर्षित हो रहे हैं। अपने तीनों ही रूप जानते हो ना! इस समय सभी बच्चे ब्राह्मण रूप में हैं और ब्राह्मणों की लास्ट Read more…
1. “जिस आत्मा में पवित्रता है, उसकी चाल, चलन, चेहरा चमकता है इसलिए पवित्रता ही जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली है। वास्तव में आप सब बच्चों का आदि स्वरूप ही पवित्रता है। अनादि स्वरूप भी पवित्रता है। ऐसी पवित्र आत्माओं Read more…
1. “इसलिए बापदादा सभी बच्चों को यही स्मृति दिलाते हैं कि सदा हर एक से दुआयें लो और दुआयें दो। अपने दुआओं की शुभ भावना से मंगल मिलन मनाओ क्योंकि अगर कोई बद-दुआ देता भी है, वह तो परवश है Read more…
1. “बापदादा को आज के दिन सच्चे भगत भी बहुत याद आ रहे हैं। वह व्रत रखते हैं एक दिन का और आपने व्रत रखा है सारे जीवन में सम्पूर्ण पवित्र बनने का। वह खाने का व्रत रखते हैं, आपने Read more…
1. “इतने बड़े भाग्य की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ कितना सहज हुआ। सिर्फ दिल से जाना, माना और अपना बनाया “मेरा बाबा”। दिल से पहचाना, मैं बाबा का, बाबा मेरा। मेरा मानना और अधिकारी बन जाना। अधिकार भी कितना बड़ा Read more…
1. “चेकिंग बहुत आवश्यक है क्योंकि माया वर्तमान समय भिन्न-भिन्न रॉयल प्रकार के अलबेलापन और रॉयल आलस्य के रूप में ट्रायल करती रहती है इसलिए अपनी चेकिंग सदा करते चलो। इतने अटेन्शन से, अलबेले रूप से चेकिंग नहीं – बुरा Read more…
1. “स्नेह की अनुभूति अनेक परमात्म खजाने के मालिक बनाने वाली है और सर्व परमात्म खजानों की गोल्डन चाबी बाप ने सर्व बच्चों को दी है। जानते हो ना! वह गोल्डन चाबी क्या है? वह गोल्डन चाबी है – “मेरा Read more…
1. “पहले यह चेक करो कि निमित्त भाव है? कोई भी रॉयल रूप का मैं पन तो नहीं है? मेरापन तो नहीं है? साधारण लोगों का मैं और मेरा भी साधारण है, मोटा है लेकिन ब्राह्मण जीवन का मेरा और Read more…