Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Tag: आत्मा | Soul

8th April 2026

“बाप भी अशरीरी है, तुम आत्मा भी अशरीरी हो। बाप आत्माओं को ही देखते हैं, सब अकालतख्त पर विराजमान आत्मायें हैं। तुम भी आत्मा भाई–भाई की दृष्टि से देखो, इसमें बड़ी मेहनत है। देह के भान में आने से ही Read more…


7th April 2026

“ओम् शान्ति। बाप ने बच्चों को समझाया है – तुम भी कहते हो ओम् शान्ति। बाप भी कहते हैं ओम् शान्ति अर्थात् तुम आत्मायें शान्त स्वरूप हो। बाप भी शान्त स्वरूप है, आत्मा का स्वधर्म शान्त है। परमात्मा का भी Read more…


6th April 2026

“तुम बच्चों की बुद्धि में अब सारा ज्ञान है। बच्चे जानते हैं हम सृष्टि के आदि–मध्य–अन्त को जानते हैं। बाकी अन्त का थोड़ा टुकड़ा है, जिसको भी जान जायेंगे। बाबा पहले से ही सब कैसे बता दे, बाप कहते हैं Read more…


3rd April 2026

“बच्चे जब पैदा होते हैं तो अपने साथ कर्मों अनुसार तकदीर ले आते हैं। कोई साहूकार पास, कोई गरीब के पास जन्म लेते हैं। बाप भी समझते हैं कि वारिस आया है। जैसे–जैसे दान पुण्य किया है, उस अनुसार जन्म Read more…


21st March 2026

Topic: Soul; मातेश्वरी जी | Mateshwariji   “अब जो त्रिमूर्ति, गोला, झाड़, सीढ़ी, लक्ष्मी–नारायण का चित्र और श्रीकृष्ण का चित्र – यह 6 चित्र हैं मुख्य। यह जैसे पूरी प्रदर्शनी है, इनमें सब सार आ जाता है। जैसे नाटक के Read more…


10th March 2026

Topic: Soul Conscious; Shiv Baba; Sato-Rajo-Tamo   “बाप समझाते हैं, रावण राज्य होने से तुम देह–अभिमानी बने, तो तुम्हारा यह हाल होने लगा। सीढ़ी भी दिखाई है – कैसे डाउन फाल हुआ, वर्थ नाट ए पेनी का भी मुख्य कारण Read more…


5th March 2026

Topic: Soul   “बच्चों ने यह समझा है कि भगवान एक है, गॉड इज वन। सभी आत्माओं का पिता एक है। उनको परमपिता परमात्मा कहा जाता है। सृष्टि का रचयिता एक है। अनेक हो ही नहीं सकते। इस सिद्धान्त अनुसार Read more…


3rd March 2026

Topic: Gyaan; Soul   “ज्ञान और विज्ञान। इसको कहेंगे अल्फ और बे। बाप ज्ञान देते हैं अल्फ और बे का। देहली में विज्ञान भवन है परन्तु वह कोई अर्थ नहीं जानते। तुम बच्चे जानते हो ज्ञान और योग। योग से Read more…


27th February 2026

Topic: Soul; Kalpa Tree   “अहम् आत्मा का स्वधर्म है शान्त। शान्तिधाम जाने के लिए कोई पुरुषार्थ नहीं करना पड़ता है। आत्मा स्वयं शान्त स्वरूप, शान्तिधाम में रहने वाली है। हाँ थोड़ा समय शान्त रह सकती है। आत्मा कहती है Read more…


23rd February 2026

Topic: Soul “मनुष्य देह–अभिमानी रहने के आदती हैं, देही–अभिमानी रहना भूल जाते हैं इसलिए बाप घड़ी–घड़ी कहते हैं देही–अभिमानी बनो। आत्मा ही भिन्न–भिन्न चोला लेकर पार्ट बजाती है। यह हैं उनके आरगन्स। अब बाप बच्चों को कहते हैं मनमनाभव।” “Human Read more…


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