“पावन दुनिया है नई दुनिया और पतित दुनिया है पुरानी दुनिया। यह भी जानते हो बेहद के बाप का भी पार्ट है। क्रियेटर, डायरेक्टर है ना। सब मानते हैं तो जरूर उनकी कोई तो एक्टिविटी होगी ना! उनको आदमी नहीं Read more…
“इस सृष्टि चक्र का ज्ञान तुम बच्चों की बुद्धि में चलते–फिरते रहना चाहिए। तुम चैतन्य लाइट हाउस हो। सारी पढ़ाई बुद्धि में रहनी चाहिए। परन्तु वह अवस्था हुई नहीं है, होने की है। जो पास विद् ऑनर होंगे उनकी यह Read more…
Title: Maya “बाप कहते हैं मीठे–मीठे बच्चों… रात–दिन मीठे–मीठे कहते रहते हैं। बच्चे नहीं कह सकते – मीठे–मीठे बाबा। कहना तो दोनों को चाहिए। दोनों ही मीठे हैं ना। बेहद के बापदादा। परन्तु कई देह–अभिमानी सिर्फ बाबा को मीठा–मीठा कहते Read more…
“निश्चय होते हुए भी माया एकदम मुँह फेर देती है। इतना उसमें बल है जो एकदम वर्थ नाट ए पेनी बना देती है। ऐसे भी कोई न कोई सेन्टर्स पर हैं इसलिए बाप कहते हैं खबरदार रहना। भल किसको सुनाते Read more…
“गीता का ज्ञान किसने सुनाया? निराकार बाप ने। उन पर कोई ताज आदि है नहीं। वह ज्ञान का सागर, बीजरूप, चैतन्य है। तुम भी चैतन्य आत्मायें हो ना! सभी झाड़ों के आदि–मध्य–अन्त को तुम जानते हो। भल माली नहीं हो Read more…
“व्रत लेना अर्थात् वृत्ति का परिवर्तन करना।” “To make this vow (vrat) means to bring about transformation with your attitude (vruti).” “आप सभी भी मन–वचन–कर्म, वृत्ति दृष्टि द्वारा पवित्रता का अनुभव कर रहे हो ना! पवित्रता की वृत्ति अर्थात् Read more…
Title: Shrimat – Shiv Baba’s Direction or Brahma Baba’s? “रूहानी बाप आकर अपने रूहानी बच्चों अर्थात् रूहों को बैठ समझाते हैं।” “The spiritual Father comes and sits here and explains to His spiritual children, that is, to you spirits.” Read more…
“तुम बच्चे हो ईश्वरीय सम्प्रदाय। आगे थे आसुरी सम्प्रदाय। आसुरी सम्प्रदाय को यह पता नहीं है कि भोलानाथ किसको कहा जाता है। यह भी नहीं जानते कि शिव शंकर अलग–अलग हैं। वह शंकर देवता है, शिव बाप है। कुछ भी Read more…
“बाप बैठ समझाते हैं, यह दादा भी समझते हैं क्योंकि बाप बैठ दादा द्वारा समझाते हैं। तुम जैसे समझते हो वैसे दादा भी समझते हैं। दादा को भगवान नहीं कहा जाता। यह है भगवानुवाच।” “The Father sits here and explains. Read more…
If an appropriate title were to be given to today’s Murli (31st December 2025), it would be: “Are You Madhuban Ready ?” Take a moment to look within to introspect, self-reflect, and ask yourself the following questions: If any of Read more…