1. “मीठे बच्चे – निश्चय ज्ञान योग से बैठता, साक्षात्कार से नहीं। साक्षात्कार की ड्रामा में नूँध है, बाकी उससे किसी का कल्याण नहीं होता” “Sweet children, your faith develops with this knowledge and yoga, not by having visions. Visions Read more…
1. “बाप कहते हैं – मैं साधारण तन में प्रवेश करता हूँ, जो अपने जन्मों को नहीं जानते। परन्तु मैं कब आता हूँ, कैसे आता हूँ, यह किसको पता नहीं है। अभी तुम देखते हो साधारण तन में बाप आये Read more…
1. “बच्चे जानते हैं – हमारी पढ़ाई पूरी होगी तो विनाश होगा। विनाश होना जरूरी है। तुम्हारे में भी कोई जानते हैं, अगर यह समझें दुनिया विनाश होनी है तो नई दुनिया के लिए तैयारी में लग जाएं। बैग-बैगेज तैयार Read more…
1. “इतने बड़े भाग्य की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ कितना सहज हुआ। सिर्फ दिल से जाना, माना और अपना बनाया “मेरा बाबा”। दिल से पहचाना, मैं बाबा का, बाबा मेरा। मेरा मानना और अधिकारी बन जाना। अधिकार भी कितना बड़ा Read more…
1. “प्रश्नः- किस स्मृति में रहो तो रावणपने की स्मृति विस्मृत हो जायेगी? उत्तर:- सदा स्मृति रहे कि हम स्त्री-पुरुष नहीं, हम आत्मा हैं, हम बड़े बाबा (शिवबाबा) से छोटे बाबा (ब्रह्मा) द्वारा वर्सा ले रहे हैं। यह स्मृति रावणपने Read more…
1. ““मीठे बच्चे – एकान्त में बैठ अपने साथ बातें करो, हम अविनाशी आत्मा हैं, बाप से सुनते हैं, यह प्रैक्टिस करो” “Sweet children, sit in solitude and talk to yourself. Practise, “I am an imperishable soul and I listen Read more…
1. “प्रश्नः- कौन-सी एक बात तुम्हें बार-बार अपने से घोट कर पक्की करनी चाहिए? उत्तर:- हम आत्मा हैं, हम परमात्मा बाप से वर्सा ले रहे हैं। आत्मायें हैं बच्चे, परमात्मा है बाप। अभी बच्चे और बाप का मेला हुआ है। Read more…
1. “बाप ही ज्ञान का सागर है। वह सत है, चैतन्य है, अमर है। पुनर्जन्म रहित है। शान्ति का सागर, सुख का सागर, पवित्रता का सागर है।” “The Father is the Ocean of Knowledge. He is the Truth, the Living Read more…
1. “यह बाप तो कोई शास्त्र पढ़कर नहीं सुनाते। तुमको इस पढ़ाई से मनुष्य से देवता बनाते हैं। तुम आते ही हो मनुष्य से देवता बनने। हैं वह भी मनुष्य, यह भी मनुष्य। परन्तु यह बाप को बुलाते हैं कि Read more…
1. “प्रश्नः- बुद्धि को स्वच्छ बनाने का पुरूषार्थ क्या है? स्वच्छ बुद्धि की निशानी क्या होगी? उत्तर:- देही-अभिमानी बनने से ही बुद्धि स्वच्छ बनती है। ऐसे देही-अभिमानी बच्चे अपने को आत्मा समझ एक बाप को प्यार करेंगे। बाप से ही Read more…