Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

19th January 2026

“यहाँ जिनको ज्ञान है वह अपने बच्चों को विकारों से बचाते रहेंगे। अज्ञानी लोग तो अपने मुआफिक बच्चों को भी फँसाते रहेंगे। तुम जानते हो यहाँ विकार से बचाया जाता है। कन्याओं को तो पहले बचाना चाहिए। माँ–बाप जैसेकि बच्चे Read more…


18th January 2026

“जितना–जितना योग में रहेंगे उतना कांटों से फूल, सतोप्रधान बनते जायेंगे। फूल बन गये फिर यहाँ रह नहीं सकेंगे। फूलों का बगीचा है ही स्वर्ग। जो बहुत कांटों को फूल बनाते हैं उन्हें ही सच्चा खुशबूदार फूल कहेंगे। वह कभी Read more…


17th January 2026

Title: ज्ञान और भक्ति | Knowledge and Devotion   “बाप कहते हैं कल्प की आयु 5 हज़ार वर्ष है। वह फिर कह देते मनुष्य 84 लाख जन्म लेते हैं। मनुष्य को कुत्ता, बिल्ली, गधा आदि सब बना दिया है। परन्तु Read more…


16th January 2026

Title: विनाश | Destruction; आत्मा | Soul   “तुम कहते हो हम 5 हजार वर्ष पहले मिसल फिर से बेहद के बाप से पढ़ते हैं। यह विनाश भी फिर से होना है जरूर। कितने बड़े–बड़े बॉम्ब्स बनाते रहते हैं। बहुत Read more…


15th January 2026

Title: बाप | The Father; शान्तिधाम | Land of Peace; सुखधाम | Land of Happiness   “पहली–पहली मुख्य बात है ज्ञान का सागर, पतित–पावन गीता ज्ञान दाता शिव भगवानुवाच पहले–पहले उनको यह पता पड़े कि इन्हों को सिखलाने वाला अथवा Read more…


14th January 2026

Title: माया | Maya; आत्मा | Soul   “तुम ईश्वर तरफ आते हो तो माया भी तुमको छोड़ेगी नहीं, खूब पछाड़ेगी। जैसे वैद्य लोग कहते हैं – इस दवाई से पहले सारी बीमारी बाहर निकलेगी। डरना नहीं। यह भी ऐसे Read more…


13th January 2026

“वास्तव में ज्ञान है भी बहुत सहज परन्तु माया भुला देती है।” “In fact, this knowledge is very easy but Maya makes you forget it.”   “अब तुम बच्चों को ज्ञान है, जितना याद करेंगे उतना पावन बनेंगे। कम याद Read more…


12th January 2026

Title: ओम् शान्ति | Om Shanti; स्वर्ग और नर्क | Heaven and Hell   “जब ओम् शान्ति कहा जाता है तो अपना स्वधर्म याद पड़ता है। घर की भी याद आती हैपरन्तु घर में बैठ तो नहीं जाना है। बाप Read more…


11th January 2026

Title: सन्तुष्टता | Contentment   “सन्तुष्टता सदा सर्व प्राप्ति सम्पन्न है क्योंकि जहाँ सन्तुष्टता है वहाँ अप्राप्त कोई वस्तु नहीं। सन्तुष्ट आत्मा में सन्तुष्टता का नेचुरल नेचर है। सन्तुष्टता की शक्ति स्वत: और सहज चारों ओर वायुमण्डल फैलाती है। उनका Read more…


10th January 2026

“कहते हैं देह सहित देह के सम्बन्धों को भूल जाओ। इनको (ब्रह्मा बाबा को) भी देह है। इनको भी समझाने वाला दूसरा है, जिसको अपनी देह नहीं है वह बाप है विचित्र, उनको कोई चित्र नहीं है, और तो सबके Read more…


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