Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Category: Avyakt Vaani – Key Points in Hindi and English

1st February 2026

“दो शब्द गिराने वाले भी हैं, चढ़ाने वाले भी हैं, वह दो शब्द सभी जानते हैं, सबके मन में आ गया है। वह दो शब्द हैं – मैं और मेरा। भाषण में कहते हो ना, क्लास भी कराते हो ना। Read more…


25th January 2026

Title: ज्ञान | Knowledge   “बापदादा ने रिजल्ट में चेक किया तो क्या देखा? ज्ञानी, योगी, धारणा स्वरुप, सेवाधारी, चार ही सब्जेक्ट में हर एक यथाशक्ति ज्ञानी भी है, योगी भी है, धारणा भी कर रहा है, सेवा भी कर Read more…


18th January 2026

“जितना–जितना योग में रहेंगे उतना कांटों से फूल, सतोप्रधान बनते जायेंगे। फूल बन गये फिर यहाँ रह नहीं सकेंगे। फूलों का बगीचा है ही स्वर्ग। जो बहुत कांटों को फूल बनाते हैं उन्हें ही सच्चा खुशबूदार फूल कहेंगे। वह कभी Read more…


11th January 2026

Title: सन्तुष्टता | Contentment   “सन्तुष्टता सदा सर्व प्राप्ति सम्पन्न है क्योंकि जहाँ सन्तुष्टता है वहाँ अप्राप्त कोई वस्तु नहीं। सन्तुष्ट आत्मा में सन्तुष्टता का नेचुरल नेचर है। सन्तुष्टता की शक्ति स्वत: और सहज चारों ओर वायुमण्डल फैलाती है। उनका Read more…


4th January 2025

“व्रत लेना अर्थात् वृत्ति का परिवर्तन करना।” “To make this vow (vrat) means to bring about transformation with your attitude (vruti).”   “आप सभी भी मन–वचन–कर्म, वृत्ति दृष्टि द्वारा पवित्रता का अनुभव कर रहे हो ना! पवित्रता की वृत्ति अर्थात् Read more…


28th December 2025

“बापदादा ने पहले भी बताया है कि खजाने तो मिले लेकिन जमा करने की विधि क्या है? जो जितना निमित्त और निर्मान बनता है उतना ही खजाने जमा होते हैं। तो चेक करो – निमित्त और निर्मान बनने की विधि Read more…


21st December 2025

“यह परमात्म स्नेह बाप समान अशरीरी सहज बना देता है। व्यक्त भाव से परे अव्यक्त स्थिति में अव्यक्त स्वरूप में स्थित कर देता है।” “This love of God easily makes you bodiless, the same as the Father. It takes you Read more…


14th December 2025

“बापदादा जानते हैं जैसे–जैसे समय समीप आ रहा है उसी प्रमाण हर एक बच्चे के दिल में यह संकल्प, यह उमंग–उत्साह है कि अभी कुछ करना ही है क्योंकि देख रहे हो कि आज की तीनों सत्तायें अति हलचल में Read more…


7th December 2025

“परमात्मा की डायरेक्ट रचना, पहली रचना आप पवित्र आत्माओं को ही प्राप्त होती है। जिससे आप ब्राह्मण ही विश्व की आत्माओं को भी मुक्ति का वर्सा बाप से दिलाते हो। तो यह सारे चक्कर में अनादि काल, आदि काल, मध्य Read more…


30th November 2025

Avyakt Vaani Date: 18th January 2008   “जो आया है वह जाता भी है लेकिन जायेगा कैसे? स्नेह को याद करने से मेहनत चली जायेगी क्योंकि सभी को भिन्न–भिन्न समय पर बापदादा दोनों के स्नेह का अनुभव तो है। है Read more…


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