Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

Browsing:

Month: November 2025

1st December 2025

“तुमको कुछ भी कहना नहीं है। तुम साइलेन्स से विश्व पर जीत पाते हो। उन्हों की है साइंस, तुम्हारी है साइलेन्स। तुम बच्चे ज्ञान और विज्ञान का भी यथार्थ अर्थ जानते हो। ज्ञान है समझ और विज्ञान है सब कुछ Read more…


30th November 2025

Avyakt Vaani Date: 18th January 2008   “जो आया है वह जाता भी है लेकिन जायेगा कैसे? स्नेह को याद करने से मेहनत चली जायेगी क्योंकि सभी को भिन्न–भिन्न समय पर बापदादा दोनों के स्नेह का अनुभव तो है। है Read more…


29th November 2025

“कई बच्चे लिखते हैं लक्ष्मी बड़ी या सरस्वती माँ बड़ी। लक्ष्मी तो एक होती है – श्री नारायण की। अगर महालक्ष्मी को पूजते हैं तो उनको 4 भुजा दिखाते हैं। उसमें दोनों आ जाते हैं। वास्तव में उसको लक्ष्मी–नारायण की Read more…


28th November 2025

“आत्मा ही सुनती है, पढ़ती है, आत्मा में ही संस्कार हैं। हम आत्मा भिन्न–भिन्न शरीर धारण करती हैं। बच्चों को इस निश्चय बुद्धि होने में भी बड़ी मेहनत लगती है। कहते हैं बाबा घड़ी–घड़ी भूल जाते हैं। बाप समझाते हैं Read more…


27th November 2025

“तुम जानते हो बेहद का बाप सर्व का शिक्षक, सर्व का सद्गति दाता है। बेहद का सुख, बेहद का ज्ञान देने वाला है। फिर भी ऐसे बाप को भूल जाते हो। माया कितनी समर्थ है। ईश्वर को तो समर्थ कहते Read more…


26th November 2025

“मीठे–मीठे रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप कहते हैं – अपनी जांच करो कि याद की यात्रा से हम तमोप्रधान से सतोप्रधान तरफ कितना आगे बढ़े हैं क्योंकि जितना–जितना याद करेंगे उतना पाप कटते जायेंगे।” “The spiritual Father says to you Read more…


25th November 2025

“प्रश्नः–तुम बच्चों के मुख से कौन से शुभ बोल सदा निकलने चाहिए? उत्तर:-सदा मुख से यही शुभ बोल बोलो कि हम नर से नारायण बनेंगे, कम नहीं। हम ही विश्व के मालिक थे फिर से बनेंगे। लेकिन यह मंजिल ऊंची Read more…


24th November 2025

“ पहले–पहले तो अपने को पहचानो। आत्मा है ही शान्त स्वरूप। रहने का स्थान भी शान्तिधाम है। यहाँ आती है तो कर्म जरूर करना पड़ता है। जब अपने शान्तिधाम में है तो शान्त है। सतयुग में भी शान्ति रहती है। Read more…


23rd November 2025

Avyakt Vaani Date: 31st December 2007   “विशेष समय का खजाना कभी भी व्यर्थ न जाये। एक सेकण्ड भी व्यर्थ को कार्य में लगाओ। समय को सफल करो, हर श्वांस को सफल करो, हर संकल्प को सफल करो, हर शक्ति Read more…


22nd November 2025

“प्रश्नः–रावण का श्राप कब मिलता है, श्रापित होने की निशानी क्या है? उत्तर:-जब तुम देह–अभिमानी बनते हो तब रावण का श्राप मिल जाता है। श्रापित आत्मायें कंगाल विकारी बनती जाती हैं, नीचे उतरती जाती हैं। अब बाप से वर्सा लेने Read more…


×