“प्रश्नः–संगमयुग पर किन दो बातों की मेहनत करने से सतयुगी तख्त के मालिक बन जायेंगे? उत्तर:-1-दु:ख–सुख, निंदा–स्तुति में समान स्थिति रहे – यह मेहनत करो। कोई भी कुछ उल्टा–सुल्टा बोले, क्रोध करे तो तुम चुप हो जाओ, कभी भी मुख Read more…
“आत्माओं ने यह शान्ति और सुख का वर्सा कल्प पहले भी पाया था। अब फिर यह वर्सा रिपीट हो रहा है। रिपीट हो तब सृष्टि का चक्र भी फिर से रिपीट हो। रिपीट तो सब होता है ना। जो कुछ Read more…
“बाप कहते हैं – बच्चे, सर्विसएबुल बनो, बाबा को फालो करो क्योंकि मैं भी तो सर्विस करता हूँ ना। आया ही हूँ सर्विस करने के लिए और रोज़–रोज़ सर्विस करता हूँ क्योंकि रथ भी तो लिया है ना। रथ भी Read more…
“जैसे मोटर से पेट्रोल खत्म होने पर फिर भरा जाता है ना। अभी तुम्हारी आत्मा समझती है – हमारे में पेट्रोल कैसे भरेगा! बैटरी खाली होती है फिर उनमें पावर भरी जाती है ना। बैटरी खाली होती है तो लाइट Read more…
“प्रश्नः–बाप अपने बच्चों को उन्नति की कौन सी एक युक्ति बताते हैं? उत्तर:-बच्चे, तुम आज्ञाकारी बन बापदादा की मत पर चलते रहो। बापदादा दोनों इक्ट्ठे हैं, इसलिए अगर इनके कहने से कुछ नुकसान भी हुआ तो भी रेस्पान्सिबुल बाप है, Read more…
“प्रश्नः–ड्रामा के किस राज़ को समझने वाले कौन–सी राय किसी को भी नहीं देंगे? उत्तर:-जो समझते हैं कि ड्रामा में जो कुछ पास्ट हो गया वह फिर से एक्युरेट रिपीट होगा, वह कभी किसी को भक्ति छोड़ने की राय नहीं Read more…
“प्रश्नः–होलीएस्ट ऑफ दी होली बच्चों का नशा और निशानियाँ क्या होंगी? उत्तर:-उन्हें नशा होगा कि हमने होलीएस्ट ऑफ दी होली बाप की गोद ली है। हम होलीएस्ट देवी–देवता बनते हैं, उनके अन्दर मन्सा में भी खराब ख्यालात आ नहीं सकते। Read more…
“प्रश्नः–किस मुख्य विशेषता के कारण पूज्य सिर्फ देवताओं को ही कह सकते हैं? उत्तर:-देवताओं की ही विशेषता है जो कभी किसी को याद नहीं करते। न बाप को याद करते, न किसी के चित्रों को याद करते, इसलिए उन्हें पूज्य Read more…
“तुमको कुछ भी कहना नहीं है। तुम साइलेन्स से विश्व पर जीत पाते हो। उन्हों की है साइंस, तुम्हारी है साइलेन्स। तुम बच्चे ज्ञान और विज्ञान का भी यथार्थ अर्थ जानते हो। ज्ञान है समझ और विज्ञान है सब कुछ Read more…
“कई बच्चे लिखते हैं लक्ष्मी बड़ी या सरस्वती माँ बड़ी। लक्ष्मी तो एक होती है – श्री नारायण की। अगर महालक्ष्मी को पूजते हैं तो उनको 4 भुजा दिखाते हैं। उसमें दोनों आ जाते हैं। वास्तव में उसको लक्ष्मी–नारायण की Read more…