1. “संकल्प बहुत अच्छे करते हो, इतने अच्छे संकल्प करते हैं जो सुन–सुन खुश हो जाते हैं। संकल्प करते हो लेकिन बाद में क्या होता है? संकल्प कमजोर क्यों हो जाते हैं? जब चाहते भी हो क्योंकि बाप से प्यार Read more…
1. “वास्तव में सृष्टि भर में महिमा जो भी है उस एक की ही है और कोई की महिमा है नहीं। अभी देखो ब्रह्मा में अगर बाबा की प्रवेशता नहीं होती तो यह कौड़ी तुल्य है। अभी तुम कौड़ी तुल्य Read more…
1. “तुम अपने मुख से सदैव रत्न निकालो, पत्थर नहीं।” 2. “बाप ध्यान के लिए भी डायरेक्शन देते हैं सिर्फ भोग लगाकर आओ। बाबा यह तो कहते नहीं कि वैकुण्ठ में जाओ, रास–विलास आदि करो। दूसरी जगह गये तो Read more…
“प्रश्नः– जो विनाशकाले विपरीत बुद्धि हैं, उन्हें तुम्हारी किस बात पर हँसी आती है? उत्तर:- तुम जब कहते हो अभी विनाश काल नज़दीक है, तो उन्हें हँसी आती है। तुम जानते हो बाप यहाँ बैठे तो नहीं रहेंगे, बाप की Read more…
“प्रश्नः– अवस्था बिगड़ने का कारण क्या है? किस युक्ति से अवस्था बहुत अच्छी रह सकती है? उत्तर:- 1. ज्ञान की डांस नहीं करते, झरमुई झगमुई में अपना समय गँवा देते हैं इसलिए अवस्था बिगड़ जाती है। 2. दूसरों को दु:ख Read more…
1. “बेहद का बाप आत्माओं को सुनाते हैं। आत्मा ही सुनती है। सब कुछ आत्मा ही करती है – इस शरीर द्वारा इसलिए पहले–पहले अपने को आत्मा जरूर समझना है।” 2. “योग अर्थात् पढ़ाने वाले की याद। यह बाप Read more…
1. “आप ब्राह्मणों के ऊपर परमात्म छत्रछाया है। जैसे वाटरप्रूफ कितना भी वाटर हो लेकिन वाटरप्रूफ द्वारा वाटरप्रूफ हो जाते हैं। ऐसे ही कितनी भी हलचल हो लेकिन ब्राह्मण आत्मायें परमात्म छत्रछाया के अन्दर सदा प्रूफ हैं। बेफिकर बादशाह हो Read more…
“मीठे बच्चे – सारा मदार कर्मों पर है, सदा ध्यान रहे कि माया के वशीभूत कोई उल्टा कर्म न हो जिसकी सजा खानी पड़े“ 1. “इस पुरानी दुनिया को देखते हुए भी न देखो।“ 2. “बाप का भी Read more…
“प्रश्नः– बाप ने तुम्हें ऐसी कौन–सी समझ दी है जिससे बुद्धि का ताला खुल गया? उत्तर:- बाप ने इस बेहद अनादि ड्रामा की ऐसी समझ दी है, जिससे बुद्धि पर जो गॉडरेज का ताला लगा था वह खुल गया। पत्थरबुद्धि Read more…
“मीठे बच्चे – तुम्हें जो भी ज्ञान मिलता है, उस पर विचार सागर मंथन करो, ज्ञान मंथन से ही अमृत निकलेगा” “प्रश्नः– 21 जन्मों के लिए मालामाल बनने का साधन क्या है? उत्तर:- ज्ञान रत्न। जितना तुम इस पुरूषोत्तम Read more…