Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Author: admin

9th April 2025

“प्रश्नः- कौन-सा मुख्य एक पुरुषार्थ स्कॉलरशिप लेने का अधिकारी बना देता है? उत्तर:- अन्तर्मुखता का। तुम्हें बहुत अन्तर्मुखी रहना है। बाप तो है कल्याणकारी। कल्याण के लिए ही राय देते हैं। जो अन्तर्मुखी योगी बच्चे हैं वह कभी देह-अभिमान में Read more…


8th April 2025

“प्रश्नः- कौन-सा पाठ बाप ही पढ़ाते हैं, कोई मनुष्य नहीं पढ़ा सकते? उत्तर:- देही-अभिमानी बनने का पाठ एक बाप ही पढ़ाते हैं, यह पाठ कोई देहधारी नहीं पढ़ा सकता। पहले-पहले तुमको आत्मा का ज्ञान मिलता है। तुम जानते हो हम Read more…


7th April 2025

1. “मीठे बच्चे – सबसे अच्छा दैवीगुण है शान्त रहना, अधिक आवाज़ में न आना, मीठा बोलना, तुम बच्चे अभी टॉकी से मूवी, मूवी से साइलेन्स में जाते हो, इसलिए अधिक आवाज़ में न आओ” 2. “दैवी-गुण होते ही हैं Read more…


6th April 2025

1.    “रूहानी फ़खुर में रहते हो इसलिए बेफिक्र बादशाह हो। सवेरे उठते हैं तो भी बेफिक्र, चलते फिरते, कर्म करते भी बेफिक्र और सोते हो तो भी बेफिक्र नींद में सोते हो। ऐसे अनुभव करते हो ना!”   2.    “बेफिक्र Read more…


5th April 2025

1.    “अब गीता का भगवान राजयोग सिखलाते थे तो जरूर इससे सिद्ध होता है नर से नारायण बनाते थे। तुम बच्चे जानते हो भगवान हमको पढ़ाते हैं। बरोबर नर से नारायण बनाते हैं।“   2.    “मनुष्य तो एक भी नहीं Read more…


4th April 2025

1.    “मीठे बच्चे – अभी तुम पुरुषोत्तम बनने का पुरुषार्थ करते हो, पुरुषोत्तम हैं देवतायें, क्योंकि वह हैं पावन, तुम पावन बन रहे हो“   2.    “जैसे बाप ने सुनाया था एक बच्ची किचड़े के डिब्बे में पड़ी थी, वह Read more…


3rd April 2025

1.    “मीठे बच्चे – तुम्हारा यह नया झाड़ बहुत मीठा है, इस मीठे झाड़ को ही कीड़े लगते हैं, कीड़ों को समाप्त करने की दवाई है मनमनाभव“   2.    “चित्र तो तुमने बहुत बनाये हैं। बाबा पूछते हैं इन सब Read more…


2nd April 2025

“प्रश्नः– कहा जाता है, आत्मा अपना ही शत्रु, अपना ही मित्र है, सच्ची मित्रता क्या है? उत्तर:- एक बाप की श्रीमत पर सदा चलते रहना – यही सच्ची मित्रता है। सच्ची मित्रता है एक बाप को याद कर पावन बनना Read more…


1st April 2025

1.    “बच्चों को ज्ञान और भक्ति का राज़ तो समझाया है, ज्ञान माना दिन – सतयुग–त्रेता, भक्ति माना रात – द्वापर–कलियुग।“   2.    ” बहुत कहते हैं शिवबाबा आप तो अन्तर्यामी हो। बाबा कहते हैं मैं हूँ नहीं, मैं किसके Read more…


Key Points From Daily Murli – March 2025

1st March 2025 “प्रश्नः– याद की यात्रा को दूसरा कौन–सा नाम देंगे? उत्तर:- याद की यात्रा प्रीत की यात्रा है। विपरीत बुद्धि वाले से नाम–रूप में फँसने की बदबू आती है। उनकी बुद्धि तमोप्रधान हो जाती है। जिनकी प्रीत एक Read more…


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