“प्रश्नः- माया का श्राप क्यों लगता है? श्रापित आत्मा की गति क्या होगी? उत्तर:- 1. बाप और पढ़ाई का (ज्ञान रत्नों का) निरादर करने से, अपनी मत पर चलने से माया का श्राप लग जाता है, 2. आसुरी चलन है, Read more…
1. “आत्मा और शरीर दो चीज़ें हैं। आत्मा एक स्टॉर है और बहुत सूक्ष्म है। उनको कोई देख नहीं सकते। तो यहाँ जब आकर बैठते हैं तो देही-अभिमानी होकर बैठना है। यह भी एक हॉस्पिटल है ना – आधाकल्प के Read more…
Title: When we start saying “Wah Baba Wah!”, we stop saying “Why Baba Why ?”Speaker: Dadi JankiClass Date: 16th November 2010 Short Video Clip with English Translation: Link to the PDF document of the video with English translation: https://waahdramawaah.com/wp-content/uploads/2025/06/wah-waah-not-why-why-dadi-janki-pdf.pdf Link Read more…
1. “प्रश्नः- अपना कल्याण करने के लिए किन दो बातों का पोतामेल रोज़ देखना चाहिए? उत्तर:- “योग और चलन” का पोतामेल रोज़ देखो। चेक करो कोई डिस-सर्विस तो नहीं की? सदैव अपनी दिल से पूछो हम कितना बाप को याद Read more…
1. “इस याद करने में ही माया के विघ्न पड़ते हैं।” “It is only in this remembrance that the obstacles of Maya come.” 2. “मूलवतन है मनमनाभव, अमरपुरी है मध्याजी भव। हर एक बात में दो अक्षर ही आते हैं।” Read more…
1. “यह बच्चों को अपनी पहचान मिलती है। बाप भी ऐसे कहते हैं, हम सभी आत्मायें हैं, सब मनुष्य ही हैं। बड़ा हो या छोटा हो, प्रेजीडेन्ट, राजा रानी सब मनुष्य हैं। अब बाप कहते हैं सभी आत्मायें हैं, मैं Read more…
1. “पहले यह चेक करो कि निमित्त भाव है? कोई भी रॉयल रूप का मैं पन तो नहीं है? मेरापन तो नहीं है? साधारण लोगों का मैं और मेरा भी साधारण है, मोटा है लेकिन ब्राह्मण जीवन का मेरा और Read more…
1. “प्रश्नः- किस सहज पुरूषार्थ से तुम बच्चों की दिल सब बातों से हटती जायेगी? उत्तर:- सिर्फ रूहानी धन्धे में लग जाओ, जितना-जितना रूहानी सर्विस करते रहेंगे उतना और सब बातों से स्वत: दिल हटती जायेगी। राजाई लेने के पुरूषार्थ Read more…
1. “भक्ति मार्ग में दान-पुण्य तो करते हैं ना। कोई ने धर्मशाला बनाई, कोई ने हॉस्पिटल बनाई, बुद्धि में समझते हैं इनका फल दूसरे जन्म में मिलेगा। बिगर कोई आश, अनासक्त हो कोई करे – ऐसा होता नहीं है। बहुत Read more…
1. “ऐसे समझ से याद करना है। पहले तो मैं आत्मा हूँ – यह पक्का करो फिर बाप का परिचय बुद्धि में अच्छी रीति धारण करो। अन्तर्मुखी बच्चे ही अच्छी रीति समझ सकते हैं कि हम आत्मा बिन्दी हैं। हमारी Read more…