Waah Drama Waah! Waah Baba Waah!

Key Points From Daily Sakar Vaani and Avyakt Vaani – In Hindi and English

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Month: January 2026

13th January 2026

“वास्तव में ज्ञान है भी बहुत सहज परन्तु माया भुला देती है।” “In fact, this knowledge is very easy but Maya makes you forget it.”   “अब तुम बच्चों को ज्ञान है, जितना याद करेंगे उतना पावन बनेंगे। कम याद Read more…


12th January 2026

Title: ओम् शान्ति | Om Shanti; स्वर्ग और नर्क | Heaven and Hell   “जब ओम् शान्ति कहा जाता है तो अपना स्वधर्म याद पड़ता है। घर की भी याद आती हैपरन्तु घर में बैठ तो नहीं जाना है। बाप Read more…


11th January 2026

Title: सन्तुष्टता | Contentment   “सन्तुष्टता सदा सर्व प्राप्ति सम्पन्न है क्योंकि जहाँ सन्तुष्टता है वहाँ अप्राप्त कोई वस्तु नहीं। सन्तुष्ट आत्मा में सन्तुष्टता का नेचुरल नेचर है। सन्तुष्टता की शक्ति स्वत: और सहज चारों ओर वायुमण्डल फैलाती है। उनका Read more…


10th January 2026

“कहते हैं देह सहित देह के सम्बन्धों को भूल जाओ। इनको (ब्रह्मा बाबा को) भी देह है। इनको भी समझाने वाला दूसरा है, जिसको अपनी देह नहीं है वह बाप है विचित्र, उनको कोई चित्र नहीं है, और तो सबके Read more…


9th January 2026

“पावन दुनिया है नई दुनिया और पतित दुनिया है पुरानी दुनिया। यह भी जानते हो बेहद के बाप का भी पार्ट है। क्रियेटर, डायरेक्टर है ना। सब मानते हैं तो जरूर उनकी कोई तो एक्टिविटी होगी ना! उनको आदमी नहीं Read more…


8th January 2026

“इस सृष्टि चक्र का ज्ञान तुम बच्चों की बुद्धि में चलते–फिरते रहना चाहिए। तुम चैतन्य लाइट हाउस हो। सारी पढ़ाई बुद्धि में रहनी चाहिए। परन्तु वह अवस्था हुई नहीं है, होने की है। जो पास विद् ऑनर होंगे उनकी यह Read more…


7th January 2026

Title: Maya “बाप कहते हैं मीठे–मीठे बच्चों… रात–दिन मीठे–मीठे कहते रहते हैं। बच्चे नहीं कह सकते – मीठे–मीठे बाबा। कहना तो दोनों को चाहिए। दोनों ही मीठे हैं ना। बेहद के बापदादा। परन्तु कई देह–अभिमानी सिर्फ बाबा को मीठा–मीठा कहते Read more…


6th January 2026

“निश्चय होते हुए भी माया एकदम मुँह फेर देती है। इतना उसमें बल है जो एकदम वर्थ नाट ए पेनी बना देती है। ऐसे भी कोई न कोई सेन्टर्स पर हैं इसलिए बाप कहते हैं खबरदार रहना। भल किसको सुनाते Read more…


5th January 2026

“गीता का ज्ञान किसने सुनाया? निराकार बाप ने। उन पर कोई ताज आदि है नहीं। वह ज्ञान का सागर, बीजरूप, चैतन्य है। तुम भी चैतन्य आत्मायें हो ना! सभी झाड़ों के आदि–मध्य–अन्त को तुम जानते हो। भल माली नहीं हो Read more…


4th January 2025

“व्रत लेना अर्थात् वृत्ति का परिवर्तन करना।” “To make this vow (vrat) means to bring about transformation with your attitude (vruti).”   “आप सभी भी मन–वचन–कर्म, वृत्ति दृष्टि द्वारा पवित्रता का अनुभव कर रहे हो ना! पवित्रता की वृत्ति अर्थात् Read more…


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