Skip to content
Explore the archive

Tag: योग | Yoga

14th September 2026

(1) दुनिया में एक भी मनुष्य मात्र नहीं जिसको आत्मा का ज्ञान हो। आत्मा का ही ज्ञान नहीं है तो परमपिता परमात्मा का ज्ञान कैसे हो सकता है। Not a single human being in the world has this knowledge of…

Read article →

6th August 2026

(1) प्रश्नः-योग की सिद्धि क्या है? पक्के योगी की निशानी सुनाओ?उत्तर:-सब कर्मेन्द्रियाँ बिल्कुल शान्त, शीतल हो जाएं – यह है योग की सिद्धि। पक्के योगी बच्चे वह जिनकी कर्मेन्द्रियाँ जरा भी चंचल न हों। रिंचक भी किसी देहधारी में आंख…

Read article →

10th May 2026

“आप सभी बच्चों का सर्व आत्माओं के प्रति चैलेन्ज है कि हम योगी जीवन वाले हैं। सिर्फ योग लगाने वाले नहीं लेकिन योगी जीवन वाले हैं। जीवन दो चार घण्टे की नहीं होती। जीवन सदाकाल के लिए होती है। तो…

Read article →

3rd May 2026

“बापदादा ने देखा कोई–कोई बच्चे बहुत अच्छे याद की लगन में, सेवा में लगे हुए हैं। अमृतवेला बहुत अच्छी रीति से अनुभव करते हैं। अशरीरीपन का भी अनुभव करते हैं लेकिन जब कर्मयोगी बनने का समय आता है तो दोनों…

Read article →

23rd April 2026

“दिन–प्रतिदिन बच्चों की लगन बढ़ती जाती है। जितना बाप को याद करेंगे उतना लव बढ़ेगा। बील्वेड मोस्ट बाप है ना। न सिर्फ अभी परन्तु भक्ति मार्ग में भी तुम बील्वेड मोस्ट समझते थे। कहते थे – बाबा जब आप आयेंगे…

Read article →

7th April 2026

“ओम् शान्ति। बाप ने बच्चों को समझाया है – तुम भी कहते हो ओम् शान्ति। बाप भी कहते हैं ओम् शान्ति अर्थात् तुम आत्मायें शान्त स्वरूप हो। बाप भी शान्त स्वरूप है, आत्मा का स्वधर्म शान्त है। परमात्मा का भी…

Read article →

6th April 2026

“तुम बच्चों की बुद्धि में अब सारा ज्ञान है। बच्चे जानते हैं हम सृष्टि के आदि–मध्य–अन्त को जानते हैं। बाकी अन्त का थोड़ा टुकड़ा है, जिसको भी जान जायेंगे। बाबा पहले से ही सब कैसे बता दे, बाप कहते हैं…

Read article →

2nd March 2026

Topic: Yog; Remembrance; Murli   “बाप सभी बच्चों को पहले–पहले तो यहाँ बैठ करके लक्ष्य में टिकने के लिए दृष्टि देते हैं कि जैसे मैं शिवबाबा की याद में बैठा हूँ, तुम भी शिवबाबा की याद में बैठो। प्रश्न उठता…

Read article →

9th February 2026

Title: Soul; World Cycle; बापदादा | BapDada    “बाप, दादा द्वारा अर्थात् शिवबाबा ब्रह्मा दादा द्वारा समझाते हैं, यह पक्का कर लो। लौकिक संबंध में बाप अलग, दादा अलग होता है। बाप से दादा का वर्सा मिलता है। कहते हैं…

Read article →

31st January 2026

Title: Remembrance; Soul; Shrimat; Yoga   “तुम पवित्र देवी–देवतायें थे, तुम्हारा कुल वा डिनायस्टी है, वह सब निर्विकारी थे। कौन निर्विकारी थे? आत्मायें। अब फिर तुम निर्विकारी बन रहे हो। जैसेकि सर्वशक्तिमान् बाप को याद कर उनसे शक्ति ले रहे…

Read article →