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Tag: Advanced

Advanced and Deep Murli

15th April 2026

“भारतवासियों का गृहस्थ–धर्म पवित्र था। प्योरिटी भी थी, सुख–शान्ति भी थी, सम्पत्ति भी बहुत थी। अब वही भारत पतित बना है, सब विकारी बने हैं। यह है दु:खधाम। भारत सुखधाम था। और जहाँ हम आत्मायें निवास करती हैं – वह…

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14th April 2026

“तुम बच्चों को बाबा बहुत सहज बात बताते हैं, बरोबर यहाँ भारत में ही स्वर्ग था। लक्ष्मी–नारायण का राज्य था। चित्र भी हैं, यह तो सब मानेंगे कि सतयुग में उन्हों का राज्य था। वहाँ कोई दु:खी नहीं था, सम्पूर्ण…

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11th April 2026

Topic(s): Advanced; Mind; Service; Knowledge; Shrimat; Patience “हर एक पुरुषार्थी बच्चे को पहले अन्तर्मुख अवस्था अवश्य धारण करनी है। अन्तर्मुखता में बड़ा ही कल्याण समाया हुआ है, इस अवस्था से ही अचल, स्थिर, धैर्यवत, निर्मान–चित्त इत्यादि दैवी गुणों की धारणा…

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8th April 2026

“बाप भी अशरीरी है, तुम आत्मा भी अशरीरी हो। बाप आत्माओं को ही देखते हैं, सब अकालतख्त पर विराजमान आत्मायें हैं। तुम भी आत्मा भाई–भाई की दृष्टि से देखो, इसमें बड़ी मेहनत है। देह के भान में आने से ही…

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7th April 2026

“ओम् शान्ति। बाप ने बच्चों को समझाया है – तुम भी कहते हो ओम् शान्ति। बाप भी कहते हैं ओम् शान्ति अर्थात् तुम आत्मायें शान्त स्वरूप हो। बाप भी शान्त स्वरूप है, आत्मा का स्वधर्म शान्त है। परमात्मा का भी…

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3rd April 2026

“बच्चे जब पैदा होते हैं तो अपने साथ कर्मों अनुसार तकदीर ले आते हैं। कोई साहूकार पास, कोई गरीब के पास जन्म लेते हैं। बाप भी समझते हैं कि वारिस आया है। जैसे–जैसे दान पुण्य किया है, उस अनुसार जन्म…

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30th March 2026

Topic(s):  Yagya   “यह राजस्व अश्वमेध अविनाशी रूद्र ज्ञान यज्ञ है। इसका क्रियेटर है मात पिता, ततत्वम्। तुम भी यज्ञ के क्रियेटर हो। तुम सब बच्चों को इस यज्ञ की बड़ी सम्भाल करनी है। यज्ञ के लिए बहुत रिस्पेक्ट रहना…

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23rd March 2026

“पहले–पहले बच्चों को सावधानी मिलती है – बाप को याद करो और वर्से को याद करो। मनमनाभव। यह अक्षर भी व्यास ने लिखा है। संस्कृत में तो बाप ने समझाया नहीं है। बाप तो हिन्दी में ही समझाते हैं। बच्चों…

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15th March 2026

Topic: Effort   “खजाने तो बापदादा द्वारा बहुत अविनाशी प्राप्त हुए हैं। सबसे पहले बड़े ते बड़ा खजाना है ज्ञान धन, जिससे मुक्ति और जीवनमुक्ति की प्राप्ति हुई है। पुरानी देह और पुरानी दुनिया से मुक्त जीवनमुक्त स्थिति और मुक्तिधाम…

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14th March 2026

Topic: Om Shanti; Shiv Baba; World Cycle; Advanced   “बहुत लोग कहते हैं ओम् शान्ति अर्थात् अपनी आत्मा की पहचान देते हैं। परन्तु खुद समझ नहीं सकते। ओम् शान्ति का अर्थ बहुत निकालते हैं। कोई कहते हैं ओम् माना भगवान।…

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