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Tag: ज्ञान और भक्ति | Knowledge and Devotion

17th October 2026

(1) प्रश्नः-किस खेल को यथार्थ रीति जानने वाले बच्चे कभी मूँझ नहीं सकते हैं? उत्तर:-दु:ख और सुख, भक्ति और ज्ञान का जो खेल चलता है, इसको यथार्थ रीति जानने वाले कभी मूँझते नहीं। तुम जानते हो भगवान किसी को दु:ख…

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25th September 2026

(1) यह घर का घर भी है और युनिवर्सिटी भी है। इसको ही गॉड फादरली वर्ल्ड युनिवर्सिटी कहा जाता है क्योंकि सारी दुनिया के मनुष्य मात्र की सद्गति होती है। रीयल वर्ल्ड युनिवर्सिटी यह है। घर का घर भी है।…

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21st September 2026

(1) तुम बच्चे अभी जानते हो भक्ति अलग चीज़ है, ज्ञान अलग चीज़ है। ज्ञान सुनाने वाला है ही एक और कोई सुना न सके। ज्ञान का सागर एक ही है। वही आकर ज्ञान से पतितों को पावन बनाते हैं।…

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16th September 2026

(1) प्रश्नः-बाप समान नॉलेजफुल बनने वाले बच्चों के जीवन की मुख्य धारणा सुनाओ? उत्तर:-वह सदैव मुस्कराते रहते, कभी भी किसी बात में उन्हें रोना नहीं आ सकता। कुछ भी होता है नथिंग न्यु। ऐसे जो अभी नॉलेजफुल अर्थात् रोना प्रूफ…

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10th September 2026

(1) वास्तव में यह अन्धियारा और सवेरा कल्प के इस पुरुषोत्तम संगमयुग पर होता है। अभी अज्ञान अन्धियारा दूर होता है। गाते भी हैं – ज्ञान सूर्य प्रगटा। वह सूर्य तो रोशनी देने वाला है। यह है ज्ञान सूर्य की…

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7th September 2026

(1) अब बाप अच्छी रीति समझाते हैं कि यह ब्रह्मा भी नम्बरवन भगत था। पिछाड़ी में नारायण की पूजा करते थे। श्रीकृष्ण की भक्ति की वा श्रीनारायण की भक्ति की, एक ही बात है। कृष्ण ही बड़ा होकर नारायण बनता…

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20th August 2026

(1) अभी तुम बच्चे समझते हो – रूहानी बाप हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अपने को आत्मा समझना चाहिए। अहम् आत्मा यह शरीर लेती हैं। अहम् आत्मा ने 84 जन्म लिए हैं। जैसे-जैसे कर्म करते हैं वैसे शरीर मिलता…

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12th August 2026

(1) जब पाप बढ़ते हैं अर्थात् मनुष्य पाप आत्मायें बन जाते हैं तब ही पतित-पावन बाप आते हैं, आकरके पतितों को पावन बनाते हैं। उस बेहद के बाप की ही महिमा है, उसको वृक्षपति भी कहा जाता है। Only when…

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27th July 2026

“बाप ज्ञान देते हैं सद्गति के लिए। सद्गति कहा जाता है जीवन–मुक्ति धाम को। यह आत्मा को बुद्धि में धारण करना है। हमारा घर शान्तिधाम है। उसको मुक्तिधाम, निर्वाणधाम भी कहा जाता है। सबसे अच्छा नाम है – शान्तिधाम। यहाँ…

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1st May 2026

“बाप बैठ समझाते हैं – भक्ति मार्ग में बहुत ही भक्ति की डांस की, ज्ञान की डांस नहीं की। भक्ति की डांस जब होती है तो ज्ञान की नहीं। जब ज्ञान की होती है तो भक्ति की नहीं क्योंकि भक्ति…

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