15th April 2026
“भारतवासियों का गृहस्थ–धर्म पवित्र था। प्योरिटी भी थी, सुख–शान्ति भी थी, सम्पत्ति भी बहुत थी। अब वही भारत पतित बना है, सब विकारी बने हैं। यह है दु:खधाम। भारत सुखधाम था। और जहाँ हम आत्मायें निवास करती हैं – वह…
Read article →“भारतवासियों का गृहस्थ–धर्म पवित्र था। प्योरिटी भी थी, सुख–शान्ति भी थी, सम्पत्ति भी बहुत थी। अब वही भारत पतित बना है, सब विकारी बने हैं। यह है दु:खधाम। भारत सुखधाम था। और जहाँ हम आत्मायें निवास करती हैं – वह…
Read article →Title: बाप | The Father; शान्तिधाम | Land of Peace; सुखधाम | Land of Happiness “पहली–पहली मुख्य बात है ज्ञान का सागर, पतित–पावन गीता ज्ञान दाता शिव भगवानुवाच पहले–पहले उनको यह पता पड़े कि इन्हों को सिखलाने वाला अथवा…
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