2nd May 2026
“दुनिया वाले भी अब यह समझ रहे हैं कि अब विनाश का समय है और स्थापना–अर्थ भगवान कहाँ गुप्त वेष में है। अब गुप्त वेष में तो तुम आत्मायें भी हो। आत्मा अलग है, शरीर अलग है। यह मनुष्य चोला…
Read article →“दुनिया वाले भी अब यह समझ रहे हैं कि अब विनाश का समय है और स्थापना–अर्थ भगवान कहाँ गुप्त वेष में है। अब गुप्त वेष में तो तुम आत्मायें भी हो। आत्मा अलग है, शरीर अलग है। यह मनुष्य चोला…
Read article →“आत्मा अविनाशी है। वह कभी खत्म नहीं होती। आत्मा जो स्टार मिसल है, वह अति सूक्ष्म है। इन आंखों से देखने में नहीं आती है। कर्तव्य सब आत्मा करती है। परन्तु घड़ी–घड़ी देह–अभिमान में आ जाते हैं तो कहते हैं…
Read article →“ज्ञान और अज्ञान दो चीजें होती हैं। ज्ञान को कहा जाता है दिन, अज्ञान को रात। घोर सोझरा और घोर अन्धियारा कहा जाता है। सोझरा माना राइज़, अन्धियारा माना फाल।” “There are the two things: knowledge and ignorance. Knowledge is…
Read article →“बाबा अक्षर कहने से लव आ जाता है क्योंकि बाप से वर्सा लिया जाता है। सिर्फ ईश्वर वा प्रभु कहने से बाप के वर्से की रसना नहीं आती। बाबा कहने से वर्सा याद आ जाता है।” “When you say: Baba,…
Read article →“बाप भी अशरीरी है, तुम आत्मा भी अशरीरी हो। बाप आत्माओं को ही देखते हैं, सब अकालतख्त पर विराजमान आत्मायें हैं। तुम भी आत्मा भाई–भाई की दृष्टि से देखो, इसमें बड़ी मेहनत है। देह के भान में आने से ही…
Read article →“ओम् शान्ति। बाप ने बच्चों को समझाया है – तुम भी कहते हो ओम् शान्ति। बाप भी कहते हैं ओम् शान्ति अर्थात् तुम आत्मायें शान्त स्वरूप हो। बाप भी शान्त स्वरूप है, आत्मा का स्वधर्म शान्त है। परमात्मा का भी…
Read article →“तुम बच्चों की बुद्धि में अब सारा ज्ञान है। बच्चे जानते हैं हम सृष्टि के आदि–मध्य–अन्त को जानते हैं। बाकी अन्त का थोड़ा टुकड़ा है, जिसको भी जान जायेंगे। बाबा पहले से ही सब कैसे बता दे, बाप कहते हैं…
Read article →“सारी दुनिया में सबके पास हद की चीज़ें हैं। यह एक ही बाप है जिसके पास बेहद की चीज़ें हैं इसलिए उनकी महिमा भी गाते हैं कि पतित–पावन है, लिबरेटर है, ज्ञान का सागर, आनन्द का सागर है। यह सब…
Read article →Topic(s): ज्ञान और अज्ञान | Knowledge and Ignorance; शिव और शंकर | Shiv and Shankar “बाप को नहीं जानना यह हुआ अज्ञान। बाप को बाप द्वारा जानना इसको कहा जाता है ज्ञान। बाप ज्ञान का तीसरा नेत्र देते हैं,…
Read article →“बाप आकर कहते हैं कल्प–कल्प के संगम पर आता हूँ। सारी रचना के आदि–मध्य–अन्त का राज़ मैं “रचता” ही आकर समझाता हूँ।” “The Father comes and says: I come at the confluence age of every cycle. Only I, the Creator,…
Read article →