12th August 2026
(1) जब पाप बढ़ते हैं अर्थात् मनुष्य पाप आत्मायें बन जाते हैं तब ही पतित-पावन बाप आते हैं, आकरके पतितों को पावन बनाते हैं। उस बेहद के बाप की ही महिमा है, उसको वृक्षपति भी कहा जाता है। Only when…
Read article →(1) जब पाप बढ़ते हैं अर्थात् मनुष्य पाप आत्मायें बन जाते हैं तब ही पतित-पावन बाप आते हैं, आकरके पतितों को पावन बनाते हैं। उस बेहद के बाप की ही महिमा है, उसको वृक्षपति भी कहा जाता है। Only when…
Read article →Title: आत्मा | Soul; सृष्टि चक्र | World Cycle; शिव बाबा | Shiv Baba; सतयुग | Golden Age; त्रेता | Silver Age; द्वापर | Copper Age; कलियुग | Iron Age; संगम | Confluence Age “तो पहले–पहले यह समझाओ हम…
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